Thursday, January 7, 2021

अन्तरद्वंद







यारअब बता भी दो, 

छुपा रही हो जो हमसे, 

अपना वो दर्द जौन सा ।

कुछ तो बात होगी वरना, 

ये नजरें तुम्हारी  हमको,

यूं 'कातर ' न नजर आती।।


5 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

बहुत खूब

Friday, 08 January, 2021  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

आभार, सर🙏

Friday, 08 January, 2021  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (10-01-2021) को   ♦बगिया भरी बबूलों से♦   (चर्चा अंक-3942)   पर भी होगी। 
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सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
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हार्दिक मंगल कामनाओं के साथ-    
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सादर...! 
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
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Saturday, 09 January, 2021  
Blogger Dr (Miss) Sharad Singh said...

वाह !
बहुत खूब....

Sunday, 10 January, 2021  
Blogger मन की वीणा said...

अद्भुत।

Sunday, 10 January, 2021  

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