Tuesday, January 5, 2021

अजनबी तपन..

 दिल मे ही अटक गई , वो छोटी सी ख़लिश हूँ,

यकीनन, न तो मैं राघव हूँ और ना ही तपिश हूँ।

मुद्दत से,अकेला हूँ दूर बहुत, करीबियों से अपने,

मगर न जाने क्यों ऐ 'परचेत', इसी मे मैं खुश हूँ।

5 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

बहुत सुन्दर

Wednesday, 06 January, 2021  
Blogger डॉ. दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 07.01.2021 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
धन्यवाद

Wednesday, 06 January, 2021  
Blogger शिवम कुमार पाण्डेय said...

वाह बहुत सुंदर।

Wednesday, 06 January, 2021  
Blogger मन की वीणा said...

बहुत खूब।
सुंदर सृजन।

Thursday, 07 January, 2021  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

आभार, आप सभी का🙏

Friday, 08 January, 2021  

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