मंजिल के करीब पहुंचने ही वाली थी
जब यह सफ़र-ए-जिन्दगी, ऐ दोस्त!
तुमने नींद मे खलल डालकर,
स्वप्न विच्छेदन कर दिया।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
वर्ण आखिरी, वैश्य, क्षत्रिय, विप्र सभी, सनातनी नववर्ष का जश्न मनाया कभी ? नहीं, स्व-नवबर्ष के प्रति जब व्यवहार ऐसा, फिर पश्चिमी नवबर्ष पर...
सुन्दर भाव।
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