Monday, December 29, 2025

हल?

 हां, उलझनें हैं क्योंकि 

बीच हमारे अनबन है,

दरमियां फासले हैं, मगर

मिलने  का भी मन है।

1 Comments:

Blogger Admin said...

ये चार पंक्तियाँ बहुत सच्ची और दिल के करीब लगती हैं। आप रिश्तों की उस हालत को पकड़ लेते हैं, जहाँ मन नाराज़ भी होता है और मिलने की चाह भी छोड़ता नहीं। अनबन, फासले और उलझनें सब होते हुए भी उम्मीद बची रहती है, यही बात इसे खास बनाती है।

Monday, 05 January, 2026  

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