Sunday, January 25, 2026

राय

वर्तमान  तुम अपना व्यर्थ ही न गंवाना,

उलझकर बातों में किसी भविष्यवेता के,

बहकावे में कभी भी हरगिज़ मत आना,

सड़कछाप, किसी दो कौड़ी के नेता के।

4 Comments:

Blogger Admin said...

यह कविता मुझे दोस्त की तरह कंधे पकड़कर समझाती हुई लगती है। आप वर्तमान की कीमत साफ शब्दों में बताते हैं। आप भविष्य बेचने वालों और सड़कछाप नेताओं दोनों से दूरी रखने की बात सीधे कहते हैं। मुझे इसकी बेबाकी पसंद आती है।

Sunday, 25 January, 2026  
Blogger सुशील कुमार जोशी said...

भविष्यवेत्ता | सही |

Sunday, 25 January, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Monday, 26 January, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Monday, 26 January, 2026  

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