Saturday, January 17, 2026

बहुरूपिये!

अब कहूं भी कैंसे कि तू हिसाब-ए-मुहब्बत, 

किस तरह मुझसे गिन-गिन के लेती थी,

रहती तो हमेशा नज़रों के सामने थी, मगर

जमाने के आगे कुछ कम ही दिखाई देती थी।

2 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

रूपिए जुड़ा है न इसीलिए :)

Sunday, 18 January, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🤣🤣

Monday, 19 January, 2026  

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