मुफ्तखोरी
जब भी, जो भी जुबां पे आता है तुम्हारी, बक देते हो,
मुफ्त में जिसका भी लिखा हुआ मिल जाए पढ़ देते हो,
फुर्सत मिले तुम्हें तो सोचना, एक कमेंट के भूखें को
क्या, सही में कभी आप उसको उसका हक देते हो?
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
5 Comments:
आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 7 जनवरी 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
Link plz🙏
वाह! क्या बात है !,
🙏🙏
सुंदर
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