ओ रे पिया, मैं तुम्हारी
अपना तन-मन लुटा के हारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी,
आगोश तुम्हारे, मेरा सुलभ लगे मन,
चाहे तन हो कितना ही भारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
संबंधों के तौर-तरीके मैं ना जानू,
और बनावटीपन मैं ना मानू,
या फिर कह लो दुनियादारी,
अब रह नहीं सकती मैं कुंवारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
कोमल हूं पर कमजोर नहीं हूं,
सहमी-सहमी भोर नहीं हूं,
हर पल साथ खड़े हो जब तुम,
कहके दिखाए कोई मुझे अबला नारी,
ओ रे पिया, मैं तुम्हारी।
2 Comments:
सुंदर
🙏🙏
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