Tuesday, February 3, 2026

दिल की बात

हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,

मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।

बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,

हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।


2 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

भरोंसा को भरोसा करें |

Tuesday, 03 February, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

सर, टंकण त्रुटियों के सुधार हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद। न चाहते हुए भी ये हो जाती हैं। Auto का जमाना है।

Wednesday, 04 February, 2026  

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home