दिल की बात
हमने भरोसा अभी भी कायम रखा है जीने मे,
मगर, ऐ 'परचेत',यह दर्द असहनीय है सीने में।
बड़े ही बुजदिल निकले ये सब, दिल दुखाने वाले,
हमने तो प्यासे को भी पानी पिलाया था, मदीने में।।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
2 Comments:
भरोंसा को भरोसा करें |
सर, टंकण त्रुटियों के सुधार हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद। न चाहते हुए भी ये हो जाती हैं। Auto का जमाना है।
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