Yकीं
रात गहरी बहुत है मगर,
यकीं रखो, हम सोएंगे नहीं।
तूम रुलाने की जितनी भी कोशिश कर लो,
रोएंगे नहीं,
बेदना के पार्क मे सन्नाटे संग
खामोशी भी बैठी है 'परचेत',
इसलिए किसी के बहकावे में आकर,
आपा खोएंगे नहीं।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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