Friday, May 8, 2026

बोझिल मन !


अगाध होते हैं रिश्ते दिलों के,

इक ज़माना था जो हम गाते,

तय पथ था और सफ़र अटल,

उम्मीदों पे कब तक ठहर पाते।


जागी है जब कुछ ऐसी तमन्ना

कि इक नये सांचे में ढल जाते,

नजर आता जो सुकून हमको,

कागज पर लफ्ज़ उतर जाते ।


सफर जारी है धीमे-धीमे मगर,  

मुकर्रर वो रास्ते नहीं भाते,

घर की मुंडेरी पे बैठने को 'परचेत', 

अब परिंदे भी नहीं आते।।

4 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर

Saturday, 09 May, 2026  
Blogger Pammi singh'tripti' said...


आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 13 मई 2026 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Wednesday, 13 May, 2026  
Blogger Anita said...

भावपूर्ण रचना

Wednesday, 13 May, 2026  
Blogger M VERMA said...

सफर जारी है धीमे-धीमे
सुन्दर सफर

Wednesday, 13 May, 2026  

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