अधूरा शेर...5
पडोस का माहौल, आबोहवा और रहन-सहन,
बिन बात खिलखिलाना, ठिकाना रास आना,
अगर हमसे पूछना ही है 'परचेत, तो यह पूछो
कि किया जाता है कैसे मुस्कुराकर गम छुपाना।
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
1 Comments:
सुंदर
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