Monday, January 11, 2010

समझदार पत्नी !

एक बार एक पहाडी गाँव के नए-नए बने एक गरीब प्रधान जी के घर पर मेहमान को कुछ देर ठहरने का सौभाग्य मिला तो उनकी धर्म- पत्नी की बुद्धिमता की प्रशंसा किये बगैर नहीं रह सका ! आइये आपको भी सुनाते है ! प्रधान जी को चावल का गरम-गरम मांड पीने का शौक था! उनकी धर्मपत्नी ने चावल अभी चूल्हे में रखे ही थे कि हम यानी मेहमान टपक गए ! बाहर प्रधान जी मेहमानों के साथ गपो में व्यस्त थे ! उनकी पत्नी ने उबलते चावलों में से मांड निकाल कर एक गिलास में उनके लिए रख दिया था! लेकिन अब प्रश्न प्रधान जी की नाक का था कि कहीं मेहमानों के सामने मांड उन्हें पीने को देकर नाक न कट जाए ! लेकिन मांड भी ठंडा हो रहा था, ठन्डे मांड से प्रधान जी भी उस पर गुस्सा कर देंगे! अब क्या करे? अत: कुछ देर इन्तजार करने के बाद अन्दर किचन से उसने जोर से गाने के से अंदाज में बोला " धान सिंह का बेटा मांड सिंह , पीना है तो आओ नहीं तो शीतलपुर को जाता है" !

बस प्रधान जी समझ गए, और "आप बैठिये मैं अभी आया" कहकर मांड पीने चले गए !

Labels:

25 Comments:

Blogger नीरज गोस्वामी said...

हा हा हा हा हा हा ...मज़ा आ गया...बहुत रोचक प्रसंग...
नीरज

Monday, 11 January, 2010  
Blogger Unknown said...

" धान सिंह का बेटा मांड सिंह , पीना है तो आओ नहीं तो शीतलपुर को जाता है"!

वाह! जोरदार तरीका है बुलाने का!

Monday, 11 January, 2010  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बहुत समझदार औरत थी. बिल्कुल सलीकेदार.:)

रामराम.

Monday, 11 January, 2010  
Blogger ललित शर्मा said...

बेहतरीन-जोर का झटका।:)

Monday, 11 January, 2010  
Blogger दिनेशराय द्विवेदी said...

किस्सा सुना हुआ है पर लगता है अधूरा है। प्रधान जी ने बाहर से जो जवाब दिया। वह भी होना चाहिए था इस में। चलो दूसरी किस्त मे ही सही। वरना पहेली बना कर पूछा भी जा सकता है।

Monday, 11 January, 2010  
Blogger Udan Tashtari said...

हा हा! सब का तरीका निकल ही आता है...

Monday, 11 January, 2010  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत आनन्द आया जी!
ब्लॉग पर हाजिरी तो हो ही गई!

Monday, 11 January, 2010  
Blogger अर्कजेश Arkjesh said...

बहुत सही । क्‍या समझदारी है !

Monday, 11 January, 2010  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

गर्म गर्म मांड पीने का शौक ---दिलचस्प लगा।

Monday, 11 January, 2010  
Blogger kavita verma said...

hahaha bahut samajhdaar patni thi vo.maja aaya padh kar.

Monday, 11 January, 2010  
Blogger विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत खूब क्या आइडिया अपनाया घरवाली ने प्रधान जी को बुलाने का..मजेदार गोदियाल जी बढ़िया एवं मजेदार घटना

Monday, 11 January, 2010  
Blogger मनोज कुमार said...

दिलचस्प।

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger स्वप्न मञ्जूषा said...

और लोग कहते हैं...कि औरतों में दिमाग नहीं होता ...
बेचारे ...!!

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger विवेक रस्तोगी said...

हा हा मजा आ गया

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger वाणी गीत said...

पत्निया ऐसी ही समझदार होती हैं ...कोई शक नहीं ...!!

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger हास्यफुहार said...

good !

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger Khushdeep Sehgal said...

गोदियाल जी,
क्या कोई पत्नी समझदार नहीं भी होती...

चलूं रसोई से आवाज़ आ रही हैं...मांड पी लो...पीना ही पड़ेगा...अपनी टांड गंजी कोई करानी है...

जय हिंद...

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger अजय कुमार said...

पति को बुलाने का दिलचस्प तरीका

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

ईश्वर ऎसी समझदार पत्नि सब को दे :)

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger vandana gupta said...

waah...........maza aa gaya.

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger राज भाटिय़ा said...

मजेदार, बुलाने का तरीका तो बहुत अच्छा लगा... लेकिन पत्नी ओर वो भी समझदार? हो सकता है :)

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger उम्मतें said...

गोदियाल जी काफी पहले घुघूती बासूती में पढ़ा था यह किस्सा ! संभवतः वे भी उसी क्षेत्र की हैं जहां के आप हैं!
दरअसल यह किस्सा भारतीय लोक मेधा का प्रमाण है, घुघूती जी को लम्बी टिप्पणी दी थी उसे ढूंढना कठिन है पर मैं काल्पनिक रूप से ही सही , वही टिप्पणी आपको भी समर्पित कर रहा हूँ !

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger देवेन्द्र पाण्डेय said...

वाह वाह मजा आ गया.

Tuesday, 12 January, 2010  
Blogger सूर्यकान्त गुप्ता said...

अरे इस तरह की एक घटना हमारे साथ घटित हुई है . हम अपने एक रिशेतादार के यहाँ पहुंचे . अब हमारे आने का समाचार उन्हें
मिल चुका था लेकिन उसी समय उनके यहाँ और mehmaan आ गए .
जिनके यहाँ हम गए थे वह रिश्ते में कह दीजिये हमारी डेढ़साली की लड़की थी याने हम उसके मौसा हुए . अब भोजन की बारी आयी . सबको प्रथम चरण में भोजन परोसा गया . दूसरी बर लोग सम्हल जाएँ सोचकर वह बिटिया चतुराई से अपने श्रीमान जी को खाली कुकर दिखाकर कहने लगीं आपको चावल लेना है क्या . .... अब श्रीमान जी समझ गए माज़रा क्या है, कहने लगे "अरे कैसी बात कर रही हैं आप हम कोई जानवर थोड़े हैं ..... " बस क्या था बाकी लोगों को दुबारा मांगने की हिम्मत कहाँ ?...... मजा आ गया ऐसा ही वाकया लिखा पाकर.

Wednesday, 13 January, 2010  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

काश हमारे प्रधान मंत्री जी भी इतने समझदार होते ......... बहुत मजेदार किस्सा सुनाया .........

Wednesday, 13 January, 2010  

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home