Monday, April 26, 2010

क्रिकेट प्रेमियों से एक सवाल !

मुझे नहीं मालूम कि अभी यह सवाल उठाना कितना तर्कसंगत अथवा जल्दबाजी वाली बात है ! मगर जैसे कि ख़बरें है और आरोप लगाए गए है, कल अगर यह पूर्ण सत्यापित हो जाता है कि आई पी एल के कुछ अथवा सभी मैच आईपीएल प्रवंधन के सदस्यों के निर्देश पर फिक्स थे ! आई पी एल के प्रवंधन को तो एक तरफ रख दीजिये, लेकिन दूसरी तरफ इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि उसमें खेलने वाले खिलाड़ियों की भी इसमें कोई न कोई भूमिका रही थी क्योंकि उन्होंने पैसे लेकर, ऊँची कीमतों में बिककर जनता और देश को धोखे में रखा ! एक ईमानदार सवाल यह है कि तो क्या तब यह सब जानने के बाद भी आप लोग इन खिलाड़ियों को वही मान-सम्मान, महान और पता नहीं क्या-क्या दर्जा देंगे, जो आजतक देते आये है? अथवा आपको तो सिर्फ अपने मनोरंजन से मतलब है, मैच में वो लोग क्या करते है, उससे आपको कोई सरोकार नहीं, कोई मतलब नहीं ?

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11 Comments:

Blogger दिगम्बर नासवा said...

kuch din mein sab bhool jaayenge ... apne desh mein aise hi chalta hai ...

Monday, 26 April, 2010  
Blogger Unknown said...

पूरी दाल ही काली है भाईजी...............
- अलबेला खत्री

Monday, 26 April, 2010  
Blogger ललित शर्मा said...

गोदियाल जी,
हम तो क्रिकेट देखते ही नही हैं।
इतना समय कहां जो दिन भर इनका तमाशा देखो।

राम राम

Monday, 26 April, 2010  
Blogger राज भाटिय़ा said...

गोदियाल जी, हम तो यह गुलामो का खेल देखते भी नही पसद भी नही करते.... भाड मै जाये यह सब ओर इस के खेलने वाले

Monday, 26 April, 2010  
Blogger kunwarji's said...

जिनके मन काले है भीतर से,
उनके hi मुख पे इतना निखार क्यों है?


कुंवर जी,

Monday, 26 April, 2010  
Blogger Satish Saxena said...

भरोसा नहीं होता यार ...

Monday, 26 April, 2010  
Blogger अजय कुमार said...

जहां बड़े लोग शामिल हों वहां कुछ पता नही चलेगा

Monday, 26 April, 2010  
Blogger मनोज कुमार said...

क्रिकेट प्रेमी (आपका सवाल क्रिकेट प्रेमी से था) मान-सम्मान न भी दें तो क्या फ़र्क़ पड़ता है। दागियों को और भी कुछ मिल जाता है, देश की भोली-भाली जनता द्वारा। पिछला चुनाव उदाहरण है।

Monday, 26 April, 2010  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

आपकी बात से सहमत हूँ मनोज जी , जिस देश में अजहर जैसे मैच फिक्सरों को अपने लाभ के लिए देश की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी अपना उम्मीदवार बनाए और देश की महान जनता (सेक्युलर जनता ) उसे इस आधार पर जिता दे कि अपना ही विरादर है, वहाँ से और भला क्या उम्मीद की जा सकती है !

Tuesday, 27 April, 2010  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

यही तो विडम्बना है कि आज हम कबड्डी, खो-खो को भूल गये हैं!

Tuesday, 27 April, 2010  
Blogger SANJEEV RANA said...

aap ne apne sawalo ka jawab khud apni hi tippani (manoj ji ka uttar dene)me de diya h
ab bolne ko kuch bhi baki na raha godial sahab

Wednesday, 28 April, 2010  

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