ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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13 Comments:
कुछ ही नहीं, बहुत कुछ बोलता है।
वैसे इसे मैं रात में ही देख चुका था :)
कार्टून के माध्यम से बहुत अच्छा व्यंग्य.
एन.डी.टी.साहेब तो मुख्यमंत्री रहते चप्पलें उठा चुके हैं फिर यह तो मुख्यमंत्री की ही चप्पलें पुंछी हैं
बड़ी विचित्र बीमारी है।
गोदियाल जी , बिल्कुल सही जा रहें हैं DSP साहब .............. जाने दिजीये न, कौन नहीं चाहता कि तरक्की करे.
kartoon bahut kuchh bolta hai...
कांटादरडम चमकाते रहने से भाग्योदय हो जाता है. फ़िर किसी बहन जी की हो तो संदेह ही नही रह जाता.:)
ठीक किया... कोई न कोई तो करता ही..
यह पुलिस जनता के लिये बनी हे या गुंडे बदमाशो की चम्चा गिरी करने के लिये? इन्हे लानत हे जी
बहुत सफाई से आपने सबकुछ इस कार्टून में कह दिया है!
बहुत कुछ बोलता है।
अच्छा व्यंग्य.. ....
अच्छा कटाक्ष...
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