यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !
आखा इशारा समझ आ गया गौदियाल जी ... मेरा बी मानना है जरूर हैं ...
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ReplyDeleteदेर से समझा कमजोर है समझदानी :)
ReplyDeleteआपकी पोस्ट की खबर हमने ली है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - सूरा सो पहचानिए ... जो लड़े दीन के हित ... - ब्लॉग बुलेटिन
ReplyDelete@ Sunil Kumar;
ReplyDeleteहा-हा-हा-हा-हा.......हा.. सर, देर आयद दुरस्त आयद !
zabardast
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