...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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कबाब में हड्डी
अबे, पहले तो ये बता तू है कौन? तुम जैसों के मुंह लगना मेरा चस्का नहीं, मेरी तो बीवी से भी बिगड़ी पड़ी है, चल हट, मुझे सम्हालना तेरे बस का न...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
आखा इशारा समझ आ गया गौदियाल जी ... मेरा बी मानना है जरूर हैं ...
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ReplyDeleteदेर से समझा कमजोर है समझदानी :)
ReplyDeleteआपकी पोस्ट की खबर हमने ली है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - सूरा सो पहचानिए ... जो लड़े दीन के हित ... - ब्लॉग बुलेटिन
ReplyDelete@ Sunil Kumar;
ReplyDeleteहा-हा-हा-हा-हा.......हा.. सर, देर आयद दुरस्त आयद !
zabardast
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