Friday, January 27, 2012

नाम की क्या फिकर.....




रूठो न इस तरह कि बात ख़ास से आम हो जाए,
बेकस धडकनों की हयात सुबह की शाम हो जाए।

कुछ इसतरह संभाले हम, बिखरने की ये कवायद,
फजीहत न महफ़िल में,रिश्तों की सरेआम हो जाए।

ढूढ़ते रहें तहेदिल से, नफरतों में तेरी मुहब्बत को,
फासलों को बढ़ाने की हर कोशिश नाकाम हो जाए।

वक्त के दिए जख्मों पर  परस्पर मरहम लगा के,
दिलों को यूं मनायें,जान इक-दूजे के नाम हो जाए।

आगाज कर 'परचेत' कुछ ऐंसा,अंजाम सुखद हो,
नाम की फिकर कैसी जब दुनिया बदनाम हो जाए।

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16 Comments:

Blogger Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

क्या भाई साहब ऐसे ऐसे मारक पंक्तियाँ !!

Friday, 27 January, 2012  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

बहुत खूब गोदियाल जी ! बढ़िया आउटकम निकला है । :)

Friday, 27 January, 2012  
Blogger चंद्रमौलेश्वर प्रसाद said...

इसी का तो आउटकम होता है झगड़ा :)

Friday, 27 January, 2012  
Blogger रश्मि प्रभा... said...

रूठो न इस तरह कि बात ख़ास से आम हो जाए,
अकुलाहट धडकनों की हयात सुबह की शाम हो जाए।
वाह ,गजब का लिखा है

Friday, 27 January, 2012  
Blogger Rajesh Kumari said...

joke aur ghazal dono lajabaab hain.

Friday, 27 January, 2012  
Blogger Kailash Sharma said...

रूठो न इस तरह कि बात ख़ास से आम हो जाए,
अकुलाहट धडकनों की हयात सुबह की शाम हो जाए।

...लाज़वाब !...बहुत ख़ूबसूरत गजल..

Friday, 27 January, 2012  
Blogger Patali-The-Village said...

चुटकुला और ग़ज़ल दोनों अच्छे है। धन्यवाद।

Friday, 27 January, 2012  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

घर में यूँ बैठे रहते हो दिन रात,
बाहर तनिक निकलो तो कुछ काम हो जाये।

Friday, 27 January, 2012  
Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

हा हा, क्या खूब कही... दोनों ही बढ़िया रहीं.

Friday, 27 January, 2012  
Blogger Aditya said...

kya baat hai sirji.. waah.. :D


kabhi waqt mile to mere blog par bhi aaiyega.. apka swaagat hai..
palchhin-aditya.blogspot.com

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger Smart Indian said...

वाह, वाह!

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger सदा said...

अनुपम भाव संयोजन ...

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger अशोक सलूजा said...

भाई परचेत जी ,
सही मूड में ...:-))))))
शुभकामनाएँ!

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger संजय भास्‍कर said...

वह क्या बात है गोदियाल जी बहुत खूब
.............................
बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।
बसंत पंचमी की शुभकामनाएं....

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

ढूंढें फिरे तहेदिल से, नफरतों में तेरी मुहब्बत को,
फीके न पड़े ये जलवे, कोशिश न नाकाम हो जाए ..

ढूँढने से तो खुदा भी मिल जाता है ... उनकी मुहाबत तो बस प्यार के दो बोलों से ही मिल जायगी ... लाजवाब लिखा है गौदियाल साहब ..

Saturday, 28 January, 2012  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

कुछ इस तरह संभाले हम, बिखरने की ये कवायदें,
फजीहत न महफ़िल में,रिश्तों की सरेआम हो जाए।

बहुत खूब .. खूबसूरत गज़ल

Saturday, 28 January, 2012  

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