वाह गोदियाल जी..कहते है एक चित्र हजार लाइन व्यक्त करता है..बहुत सुन्दर व्यंग्य दर्शाया है...सच में आजकल कोल ब्लाक कुछ ज्यादा ही मशहूर हो गया है..या बदनाम कहे तो ज्यादा ठीक है..
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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4 Comments:
bhagna bhi ek kala hai....bhago-bhago aur bhagao..
bahut khoob!
बहुत बढ़िया |
ब्लाक लाक क्लाक
सब पर भागना ही लिखा है मौनी बाबा को ||
हा हा .. शुक्र है भाग रहे हैं ... थप्पड़ नहीं मार रहे ... अब तो क्या क्या हो रहा है ..
मजेदार कार्टून ...
वाह गोदियाल जी..कहते है एक चित्र हजार लाइन व्यक्त करता है..बहुत सुन्दर व्यंग्य दर्शाया है...सच में आजकल कोल ब्लाक कुछ ज्यादा ही मशहूर हो गया है..या बदनाम कहे तो ज्यादा ठीक है..
बढ़िया प्रस्तुति के लिए साधुवाद..नमस्कार
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