ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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13 Comments:
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
अच्छी प्रस्तुति !!
ha ha ha ....
gajab ka tanz h
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
http://rohitasghorela.blogspot.in/2012/12/blog-post.html
बहुत खूब!
बेहतर प्रस्तुति !!
बेहतर प्रस्तुति !!
बड़े प्लान हैं।
गरीब के लिए तो आने वाले दिन प्रलय से कम नहीं होंगे|
Gyan Darpan
:-)
हा हा हा
FD आई :)
उम्दा, बेहतरीन प्रस्तुति !!
कुछ दिनों से अधिक व्यस्त रहा इसलिए आपके ब्लॉग पर आने में देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ !
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है
मेरे पिता ही मेरी माँ --जन्मदिन पर विशेष
http://sanjaybhaskar.blogspot.in/2012/12/2.html#links
ये प्रलय तो अब आने ही वाली है ... गरीबों का हाथ ही है इसके पीछे ... जबरदस्त ...
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