...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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बोल संस्करण !
हमने तो मरने को नहीं कहा था, अरे वो, हमें पत्थर दिल कहने वालों, जो पास है तुम्हारे उसी पे जी लेते, मुफलिसी , तंगदिली मे जीने वालों । बस, मे...
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नोट: फिलहाल टिप्पणी सुविधा मौजूद है! मुझे किसी धर्म विशेष पर उंगली उठाने का शौक तो नहीं था, मगर क्या करे, इन्होने उकसा दिया और मजबूर कर द...
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ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की य...
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तमाम जंगल के बीहड़ों में जो कुछ घटित हो रहा हो, उससे क्या उस जंगल का राजा अंविज्ञ रह सकता है? या फिर यूं कहा जाए कि यदि उसे उसके राज्य मे...
nice.thanks
ReplyDeleteआयर-लैंडी भ्रूण हो, हो असमय नहिं मौत ।
ReplyDeleteबचपन बीते नार्वे, मातु-पिता गर सौत ।
मातु-पिता गर सौत, हेकड़ी वहां भुला दे ।
यू के में पढ़ युवा, सेक्स ब्राजील खुला दे ।
शादी भारत आय, सके नहिं लेकिन कायर ।
बिता बुढापा जाय, सही सबसे है आयर ।।
:):) अब बच्चे ऐसे ही धमकाने वाले हैं ।
ReplyDeleteवहां जाकर बच्चे नहीं , पेरेंट्स को सुधारना पड़ेगा. :)
ReplyDeletesarthak post hetu aabhar
ReplyDeleteहम हिंदी चिट्ठाकार हैं
दराल साहब की बात सही है, नॉर्वे मे तो माँ-बाप का ही इलाज हो रहा है
ReplyDelete:-)
ReplyDeleteमरना थोड़े ही है!
बच्चे न जाने कब से जिद कर रहे हैं।
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