कुछ हो ना हो, जन साधारण जितना जूजा है अब और जुजता रहेगा मलेरिया, फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, फाल्सीपेरम, कंजकटीवाईटीस, शिरशुल, अवर्णित विषम जवर इत्यादि कई अजैविक - घातक - वेदनाकारी - पीड़ामय अवस्थाओ से, लेकिन अब कारागृह सतर्क हो जायेंगे, लगे हाथो, आये दिनों में कम से कम डेंगू या अन्य कोई प्रचलित मछर अथवा उनकी कोई जाती - प्रजाति को प्रवेश निषेध जरुर लगेगा - कारागृह में मच्छरों का अब आना जाना कुछ दिन की ही बात रह गयी अब | और यह भगाए - प्रताड़ित - निष्कासित मच्छर जाये तो जाये कहाँ! ............. जाए तो जाए कहाँ, समजेगा कौन यहाँ, दर्द भरे मच्छरों की जुबान.... इन मच्छरों की जुबान जन साधारण को रात को सोते वक्त कानो में गूंजेगी |
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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9 Comments:
मच्छर खच्चर हैं बड़े, अक्षर दिखते भैस ।
बैठ गुरू करता रहा, कक्षा अन्दर ऐश ।
कक्षा अन्दर ऐश, पढाया कितने पट्ठे ।
हथियारों से लैश, धमकते जाय इकट्ठे ।
फिर भी उनको चैन, परेशाँ जनता रविकर ।
करे हिफाजत शिष्य, मारते हिट से मच्छर ।।
कुछ हो ना हो, जन साधारण जितना जूजा है अब और जुजता रहेगा मलेरिया, फ्लू, स्वाइन फ्लू, डेंगू, चिकनगुनिया, फाल्सीपेरम, कंजकटीवाईटीस, शिरशुल, अवर्णित विषम जवर इत्यादि कई अजैविक - घातक - वेदनाकारी - पीड़ामय अवस्थाओ से, लेकिन अब कारागृह सतर्क हो जायेंगे, लगे हाथो, आये दिनों में कम से कम डेंगू या अन्य कोई प्रचलित मछर अथवा उनकी कोई जाती - प्रजाति को प्रवेश निषेध जरुर लगेगा - कारागृह में मच्छरों का अब आना जाना कुछ दिन की ही बात रह गयी अब | और यह भगाए - प्रताड़ित - निष्कासित मच्छर जाये तो जाये कहाँ! ............. जाए तो जाए कहाँ, समजेगा कौन यहाँ, दर्द भरे मच्छरों की जुबान.... इन मच्छरों की जुबान जन साधारण को रात को सोते वक्त कानो में गूंजेगी |
good one
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि-
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (25-11-2012) के चर्चा मंच-1060 (क्या ब्लॉगिंग को सीरियसली लेना चाहिए) पर भी होगी!
सूचनार्थ...!
हा हा..
चाहे डेंगू से ही हो हम निजात तो पायें इन आतंकियों से । मच्छर को ही दया आ गई भारतवासियोंपर ।
सही बात है, इतने साल बाद तो अब मच्छरों से ही उम्मीद बची है
बहुत सुंदर
wow.............beautiful.
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