Wednesday, February 13, 2013

तोहमत न दे, दीपक जला !
















कर दुआ यही खुदा से,हो सबका भला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

घटता समक्ष जो, उससे न अंविज्ञ बन,
मूकता तज मूढ़ता,अज्ञ है तो सुज्ञ बन।
प्रज्ञता प्रकाश फैले,जिधर भी पग चला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

मृदु-शिष्ट बर्ताव से नेह,स्नेह अपार ले,
तृण-तृण समेटकर, जिन्दगी संवार ले।
कलसिरी को अनुराग, उत्सर्ग से गला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

दांपत्य-जीवन में छुपा न कोई राज हो,
युग्मन नेक हो,तारिणी न दगाबाज हो।
पाया क्या,निराश्रय होकर जो कर मला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

बुनियाद सम्बन्धों की न खिंड-मिंड हो,
अनुयोजन से कोई, तृन्ढ़ न हृत्पिंड हो।
नागकनी पुष्प से,सीख जीने की कला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला। 


रख निरन्तर जोड़े,अपने को जमीन से,
विलग न कर कभी सत्य को यकीन से।
कंट-पथरीला है पथ, हर बला को टला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

हो मन न कुलषित एवं दृष्टि में न हेय हो,
निष्काम,निःसंग भाव,परमार्थी ध्येय हो।
इंसां तो क्या,धूप को भी अंधेरों ने छला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।
  

तिमिर=darkness तोहमत=cursing सुज्ञ=intelligent प्रज्ञता=knowledge कलसिरी=quarrelsome lady उत्सर्ग=devotion खिंड-मिंड=unplaced अनुयोजन=action, तृन्ढ़=hurt हृत्पिंड=heart    नागकनी=cactus  निष्काम,निःसंग=unbiased          

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11 Comments:

Blogger Anupama Tripathi said...

बहुत सुंदर दृढ़ भाव और उत्कृष्ट रचना ...!!
शुभकामनायें ।

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger रविकर said...

बिलकुल सही लताड़-
तोहमत मत दे-
दीपक जला-
सादर--

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला

अत्यंत सार्थक रचना, बहुत शुभकामनाएं.

रामराम.

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger पूरण खण्डेलवाल said...

प्रेरक और सार्थक रचना !!

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

मात्र शिकायत न करते हुये कुछ करने को प्रेरित करती सुंदर रचना ...

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...


दांपत्य-जीवन में छुपा न कोई राज हो,
युग्मन नेक हो,तारिणी न दगाबाज हो।
पाया क्या,निराश्रय होकर जो कर मला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।

बहुत खूब!सुंदर सार्थक रचना,बधाई गोदियाल जी


RECENT POST... नवगीत,

Wednesday, 13 February, 2013  
Blogger शारदा अरोरा said...

तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला।
ye pankti hi bahut khoobsoorat likhi hai...

Thursday, 14 February, 2013  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

दांपत्य-जीवन में छुपा न कोई राज हो,
युग्मन नेक हो,तारिणी न दगाबाज हो।
पाया क्या,निराश्रय होकर जो कर मला,
तिमिर को तोहमत न दे, दीपक जला ...

ये सच कहा आपस में की राज नहीं रहना ही अच्छे दाम्पत्य की निशानी है ...सार्थक ...

Thursday, 14 February, 2013  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

तनिक सा बढ़,
जो लिखा, पढ़,
बिन किये हत,
स्वप्न मत गढ़।

Thursday, 14 February, 2013  
Blogger Asha Joglekar said...

बहुत ही खूबसूरत रचना, शब्द संयोजन और भाव कमाल का तादात्म्य है ।

Friday, 15 February, 2013  
Blogger Satish Saxena said...

यह है न रचना ...
बधाई !

Saturday, 16 February, 2013  

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