ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx
12 Comments:
सटीक-
आभार आदरणीय-
बहुत बढ़िया -
Ghor kalyug hai bhaya...
ghor kalyug.!.!.!.
:
)
Workers are careless in his rein also.
यमदूत शायद भूल गया होगा कि यमलोक में भी बहन बेटियां रहती हैं?
रामराम.
सटीक है..
बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार
आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
अर्ज सुनिये
आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे
पहले नीचे से निपटाना था..
वाह, ऊपरी अदालत में समय से पहले ही ।
हा हा ले आए .... सच में .. या चला गया ...
awesome-****
अब देखते हैं , वहां के कैदी क्या हाल करेंगे !
Post a Comment
Subscribe to Post Comments [Atom]
<< Home