Thursday, August 8, 2013

नया दौर !

बड़े-बड़ों के हौंसले, सियासत की चौखट पर डिग जाते है,
खुदा मेहरबां हो तो सर पे गधों के भी ताज टिक जाते है।  
वो दुप्पट्टे, वो चुनर, गँवा लेती हैं जिनको लुटी अस्मतें,  
जनपथ की फुटपाथ-हाट पे अकसर, वो भी बिक जाते हैं।  


























7 comments:

  1. नाम करेगा रोशन,
    सबका होगा शोषण

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  2. गधों पर ताज टिकाने की कोशीश जारी है.

    रामराम.

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