गुरुवर मिड डे मील पर, पाले नव फरमान | कुत्तों को पकड़ा रहे, पा जोखिम में जान | पा जोखिम में जान, प्यार से उसे जिमायें | खा के पहला ग्रास, अगर कुत्ता बच जाए | आय जान में जान, किन्तु कुक्कुर कुल बढ़कर | सरपट जाते भाग, पड़ें मुश्किल में गुरुवर ||
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
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regards,
Godiyal
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8 Comments:
हे भगवान हमारे बीनू फ़िरंगी को तो बख्श दो दुष्टों.
रामराम.
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गुरुवर मिड डे मील पर, पाले नव फरमान |
कुत्तों को पकड़ा रहे, पा जोखिम में जान |
पा जोखिम में जान, प्यार से उसे जिमायें |
खा के पहला ग्रास, अगर कुत्ता बच जाए |
आय जान में जान, किन्तु कुक्कुर कुल बढ़कर |
सरपट जाते भाग, पड़ें मुश्किल में गुरुवर ||
बहुत अच्छा कॉर्टून बनाया आपने।
सुन्दर
कमाल का कामयाब कार्टून ...
वाकई वह मिड डे मील देख कर ही भागा है ! कुत्ते समझदार होते हैं !
कार्टून उन बच्चों की दयनीय दशा याद दिलाता है जिनका काम खाये बिना भी नहीं चलता !
हे भगवान..
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