Tuesday, December 29, 2020

कटु सत्य।

लगे हैं जो मेरे शब्द तुमको अप्रिय, 

निकले न मेरे मुंह से होते,

ऐ प्रिये, जबरन जो मेरे मुंह मे 

अपने शब्द, तुमने न ठूंसे होते।

12 Comments:

Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

सार्थक रचना।
आने वाले नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Wednesday, 30 December, 2020  
Blogger डॉ. दिलबागसिंह विर्क said...

आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31.12.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
धन्यवाद

Wednesday, 30 December, 2020  
Blogger अनीता सैनी said...

जबरन जो मेरे मुंह मे

अपने शब्द, तुमने न ठूंसे होते...बहुत सुंदर सर।

Wednesday, 30 December, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

Sir,aapko air aapke parivar ko bhi.🙏

Wednesday, 30 December, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏aabhar Anita ji, aapka.

Wednesday, 30 December, 2020  
Blogger सुशील कुमार जोशी said...

नव वर्ष शुभ हो सभी के लिये सपरिवार। मंगलकामनाएं।

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger Kamini Sinha said...

हाँ,कभी कभी ना चाहते हुए भी मुँह से निकल ही जाती कुछ बातें,आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger Jyoti khare said...

वाह बहुत खूब

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

सर, नूतनबर्ष की हार्दिक शुभकामनाए, आप और आपके सभी परिवारजनों को।

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

आपको भी मंगलमय नूतनबर्ष की कामना।🙏

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

आभार, खरे सहाब। नवबर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।

Thursday, 31 December, 2020  
Blogger Shantanu Sanyal शांतनु सान्याल said...

सुन्दर - - नूतन वर्ष की असीम शुभकामनाएं।

Thursday, 31 December, 2020  

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