ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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12 Comments:
सार्थक रचना।
आने वाले नूतन वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ।
आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 31.12.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा| आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
धन्यवाद
जबरन जो मेरे मुंह मे
अपने शब्द, तुमने न ठूंसे होते...बहुत सुंदर सर।
Sir,aapko air aapke parivar ko bhi.🙏
🙏aabhar Anita ji, aapka.
नव वर्ष शुभ हो सभी के लिये सपरिवार। मंगलकामनाएं।
हाँ,कभी कभी ना चाहते हुए भी मुँह से निकल ही जाती कुछ बातें,आपको और आपके समस्त परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
वाह बहुत खूब
सर, नूतनबर्ष की हार्दिक शुभकामनाए, आप और आपके सभी परिवारजनों को।
आपको भी मंगलमय नूतनबर्ष की कामना।🙏
आभार, खरे सहाब। नवबर्ष की आपको हार्दिक शुभकामनाएं।
सुन्दर - - नूतन वर्ष की असीम शुभकामनाएं।
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