Wednesday, January 20, 2021

जिह्व-स्वाद।

 ना ही कोई बंदिश, ना ही कोई परहेज़,

 मैं अपने ही उदर पर कहर ढाता रहा।

 लजीज़ हरइक पकवान वो परोस्ते गये

और स्वाद का शौकीन, मैं खाता  रहा।।

2 Comments:

Blogger PS said...

बहुत बाद में समझ आती है, चटोरी जीव पेट का सत्यानाश कर देती है।

Friday, 22 January, 2021  
Blogger सुशील कुमार जोशी said...

क्या बात है :)

Friday, 22 January, 2021  

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