Sunday, January 10, 2021

बिम्बसार

तुम न कभी अश्क बहाना, ऐ दोस्त,

क्यूंकि तुम बे'गम' हो,

ये तुम्हारा धुर्त 'शो'हर तो,

यूं ही, मजे लेने के खातिर रो लेता  हैं।

2 Comments:

Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

वाह...बहुत खूब।

Monday, 11 January, 2021  
Blogger सुशील कुमार जोशी said...

वाह। विश्व हिन्दी दिवस पर शुभकामनाएं।

Monday, 11 January, 2021  

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