Monday, January 26, 2026

फलसफा जिंदगी











वो अब आ नहीं सकता फिर से, 

गुज़र गया जो वक्त अपनी राहों से,

किन्तु, मुश्किल तो होगा जिंदगी तेरा 

सुगमता से निकलना, मेरी पनाहों से।

घड़ी की तरह खिसकती जा रही हो, 

पकड़कर रखूंगा तुझे अपनी बांहों से,

सुगम-दुर्गम, हर दौर जिया है तेरे संग,

मुझे फर्क नहीं पड़ता,साहों-सलाहों से।

3 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर

Tuesday, 27 January, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

🙏🙏

Tuesday, 27 January, 2026  
Blogger पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

This comment has been removed by the author.

Tuesday, 27 January, 2026  

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