Thursday, July 23, 2026

विडंबना

 न नींद ही बची, 

न खुद को  मच्छरों से ही बचा पाए,

रात भर खुजलाते-खुजलाते

करते रहे हाये-हाए,

पैर पसारने को हमने

चारपाई और चादर बडी की थी, 

मगर 'परचेत', 

फिर भी खुलकर नही सो पाए।


1 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

हा हा

Thursday, 23 July, 2026  

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