पुलिसिए भी अपने डंडे को तेल पिला कर तैयार हैं। जनता हवलदार ने नयी नकोर चालान बुक निकाल ली है। कहीं हत्थे मत चढ जाना, बिना चालान के ही अंदर का रास्ता दिखा देगा। उसे पिछला वेलेन्टाईन याद है,
ऐसा कुछ भी ख़ास है नहीं बताने को, अपने बारे में ! बस, यों समझ लीजिये कि गुमनामी के अंधेरो में ही आधी से अधिक उम्र गुजार दी !हाँ, अपनी बात कुछ भगत सिंह जी के अंदाज में इस तरह कहूंगा ;
इन बिगड़े दिमागों में, ख्वाबों के कुछ लच्छे हैं,
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।
साभार,
गोदियाल
My humble request is to kindly ignore the typographical errors.
My fondest wish is to inspire someone else to write something even better than I have done.
Look forward to receiving your creative suggestions.
regards,
Godiyal
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13 Comments:
ला-जवाब" जबर्दस्त!!
वैलेंटाईन डे की हार्दिक शुभकामनायें !
ये तोहफा वाकई बहुत मूल्यवान है :):)
सच कितनी मेहनत करके लाया है कीमती तोहफ़ा …………प्रेमी हो तो ऐसा………………प्रेम दिवस की शुभकामनाएँ!
प्रेम का समर्पण देखिये।
यह झपटमार तो ईमानदार निकला जो सच्च बोल गया.
ये ताऊ तो कुछ ज्यादा ही सच्चा निकला.:)
रामराम.
समर्पण हो तो ऐसा ।
बहुत गहरा प्रेम ...प्रेम दिवस की शुभकामनायें
ये पहलू का तो हमें पता ही नहीं था :)
khoobsoorat tohfa..
पुलिसिए भी अपने डंडे को तेल पिला कर तैयार हैं। जनता हवलदार ने नयी नकोर चालान बुक निकाल ली है। कहीं हत्थे मत चढ जाना, बिना चालान के ही अंदर का रास्ता दिखा देगा। उसे पिछला वेलेन्टाईन याद है,
बहुत खूब गोदियाल साहब ! शुभकामनायें !
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