Sunday, August 2, 2026

अधूरी धड़कन।

 राह चलते जिंदगी की  

मैं गुम हो गया, 

भीड़ मे रहते हुए भी 

तन्हाई मे खो गया, 

कोई तो आए पास मेरे, 

गिड़गिड़ाए एहसास मेरे, 

एकाकी रात, अधूरे ख्वाब,

चादर ओढ़ मैं सो गया।

1 Comments:

Blogger सुशील कुमार जोशी said...

सुंदर

Monday, 03 August, 2026  

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