बंजारा
अरे ओ बंजारे!
ठिकाना ना ही
तेरा मुकम्मल है
और ना ही मेरा मुकम्मल,
पहचान मतलबी,
राह अजनबी,
अचानक मिल गए
इक वीराने सहरा मे,
फिर मिलें न मिलें
तू भी मुसाफिर,
मैं भी मुसाफिर!
...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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