Tuesday, August 11, 2026

किसे बताऊं?

शाम-ए-तन्हाई !

देख लिया सब-कुछ आज़माकर,

दो पैग पीड़ा के 'परचेत',

जिंदगी बसर हो गई, 

चखने मे गम खा-खाकर।

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