Saturday, January 5, 2013

एक खोती की अभिलाषा !



मुझे चाहिए ऐसा खोता, 
जब दिल चाहे तब जोता।
ढेंचू-ढेंचू कर दौड़ा आये,
 भेजू जब आने का न्योता।

मुझे चाहिए ऐसा खोता.....  

वो कूल रहे जहां तक हो, 
बड़े स्कूल से स्नातक हो, 
बोल न बोले मन चुभोता, 
मुझे चाहिए ऐसा खोता।  

हर ऋतु गाना गाना जाने,
हर पकवान पकाना जाने,
ऐन वक्त मिले न सोता, 
मुझे चाहिए ऐसा खोता।  


13 comments:

  1. आपने तो कुछ पंक्तियों में सब कुछ बखान कर दिया !!

    ReplyDelete
  2. सबको इस तरह का ही खोता मिले..

    ReplyDelete
  3. आपकी यह बेहतरीन रचना बुधवार 09/01/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

    ReplyDelete
  4. आये-हाय हाय ... बहुत खूब मज़ा आ गया ..

    ReplyDelete
  5. दुआ है आपकी इच्छा पूरी हो..

    ReplyDelete
  6. काश सारे ऐसे ही खोते हो जायें. बहुत जोरदार.

    रामराम.

    ReplyDelete
  7. आत्म निरीक्षण करने पर मजबूर कर दिया। :)

    ReplyDelete
  8. और देश को चाहिए कैसा "खोता"?

    हा हा हा .....मजेदार!.... शुक्रिया।

    ReplyDelete
  9. ऐसे अभिलाषित खोते आदर्श गृहस्थ माने जाते हैं:)

    ReplyDelete
  10. ढेंचू-ढेंचू कर दौड़ा-दौड़ा आये,
    जब दूं उसे आने का न्योता ...

    बहुत खूब ... मज़ा आ गया ... काश की सब खोते ऐसे ही होते ...

    ReplyDelete
  11. सही बात है, खोते जैसा कुछ भी नहीं

    ReplyDelete

ब्लॉगिंग दिवस !

जब मालूम हुआ तो कुछ ऐसे करवट बदली, जिंदगी उबाऊ ने, शुरू किया नश्वर में स्वर भरना, सभी ब्लॉगर बहिण, भाऊ ने,  निष्क्रिय,सक्रिय सब ...