Monday, December 24, 2012

अरे वो अधर्मी !


अरे वो अधर्मी, 
बड़ी ही अजब है तेरी ये बेशर्मी, 
कड़क सर्दी में भी ताप रहा देश,
बलात्कार एवं भ्रष्टाचार की गर्मी।  
अरे वो अधर्मी !

ऐसा चल रहा है सुशासन तेरा, 
सदय पे जुल्म, शठ पे नरमी,
डरा-डरा सा है हर वतन-परस्त,     
जेड-प्लस तले घूम रहे कुकर्मी।  
अरे वो अधर्मी !!

Labels:

17 Comments:

Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आम जनता का दर्द ...

Monday, 24 December, 2012  
Blogger ZEAL said...

हमारे देश में सिर्फ देशभक्तों को ही गिरफ्तार करने और फांसी पर लटकाने का रिवाज़ है! बलात्कारी खुले घुमते हैं यहाँ !

Monday, 24 December, 2012  
Blogger सूबेदार said...

मर्ज बद्धता गया ज्यो-ज्यो दावा किया.
अच्छी प्रस्तुति के लिए धन्यवाद

Monday, 24 December, 2012  
Blogger Shalini kaushik said...

सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति बधाई नारी महज एक शरीर नहीं

Monday, 24 December, 2012  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

तंत्र जब भ्रष्ट-तंत्र लोक तंत्र परिवार तंत्र
देश रसातल जायगा यही विदेशी मन्त्र ...

Monday, 24 December, 2012  
Anonymous Anonymous said...

बढ़िया,
जारी रहिये,
बधाई !!

Monday, 24 December, 2012  
Blogger कविता रावत said...

वतन- परस्त,
जेड-प्लस तले
घूम रहे कुकर्मी !
अरे वो अधर्मी !!
..सही तमाचा जड़ा गाल पर ..

Monday, 24 December, 2012  
Blogger Rajesh Kumari said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगल वार 25/12/12 को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चा मंच पर की जायेगी आपका स्वागत है ।

Monday, 24 December, 2012  
Blogger Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

चिंताजनक समय है

Monday, 24 December, 2012  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

शायद कभी अक्ल आये।

Monday, 24 December, 2012  
Anonymous Anonymous said...

देह में छिपी देवी । जहाँ नारी की पूजा - सम्मान होता है, देवता वहां वास करते है । कहने के लिए - चर्चा के लिए सरल परन्तु इसकी स्व-अनुभूति और फिर आचरण में यह विचार-वर्तन लाना कठिन है, और फिर भी इसकी आवश्यकता भारत और उसके कई प्रदेशो में इतनी गंभीर है - सोचना है हमें रुट कोज़ तक कैसे जाए और कौन कौन से आयाम - परिबलो पर आंकलन - नियंत्रण लाये । नहीं तो यह चित्र जितना बहार दीखता है - हम जानते है कितना भयावह है अन्दर से । ध्वनि और प्रकाश का अंधाधुंध बलात्कार और बेलगाम कंटेंट दृश्य श्राव्य सामान, कन्फ्युजाई रिस्पोंसिबल पीढिया, अपमानित और अवमूल्यित स्वतंत्रता, और इस सब में हम भी शामिल हो गए - अगर दृष्टांत 'चेरिटी बिगिन्स एट होम' के माध्यम से नहीं रखेंगे ..... देर तो वैसे काफी हो ही गयी है ... फिर भी जागे तभी प्रभात ।

Monday, 24 December, 2012  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

दुखद है, वर्तमान, भविष्य को क्या जाने।

Monday, 24 December, 2012  
Blogger लोकेन्द्र सिंह said...

फांसी पर लटका देना चाहिए इन अधर्मियों को...

Tuesday, 25 December, 2012  
Blogger Smart Indian said...

दुश्शासन धृतराष्ट्र! अफसोस! अफसोस!

Tuesday, 25 December, 2012  
Blogger udaya veer singh said...

आम जनता का दर्द ...अफसोस!

Tuesday, 25 December, 2012  
Blogger Asha Joglekar said...

अरे ओ अधर्मी ।
अपराधियों को मिल रही है उन्ही की शरण
जिनसे न्याय की उम्मीद है हमें ।
हरेक के मन के आक्रोश को जबां दे दी आपने .

Tuesday, 25 December, 2012  
Blogger Admin said...

आपके शब्द सीधे दिल पर लगते हैं, कोई घुमा-फिराकर बात नहीं की गई। गुस्सा भी है, पीड़ा भी और भीतर दबा डर भी साफ दिखता है। सबसे ज्यादा चुभता है वह विरोधाभास, जहाँ आम आदमी सहमा है और गलत करने वाले बेखौफ हैं। यह सिर्फ कविता नहीं, आज के हालात का आईना लगती है।

Wednesday, 31 December, 2025  

Post a Comment

Subscribe to Post Comments [Atom]

<< Home