Thursday, December 24, 2009

आ जाओ क्रिस, अब आ भी जाओ !


जीसस  "क्रिस" यूं कब तलक तुम,
ज़रा भी टस से "मस" नहीं होगे,
गिरजे की वीरान चार दिवारी में ,
कब तक यूंही 'जस के तस' रहोगे ?

ये वो  परोपकारी वक्त  नहीं जब,
महापुरुष  लटक जाया करते थे,
अमृत सारा का सारा औरों को बाँट ,
खुद 
जहर घटक जाया करते थे।  

तुम सदियों से नीरव लटके खड़े हो,
खामोशी की भी हद होती है भई,
एक बार सूली से उतर कर तो देखो,
दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गई।

दौलत -सोहरत की चकाचौंध में,
सभ्यता निःवस्त्र घूम रही है,
संस्कृति बचाती लाज फिर रही,
बेशर्मी शिखर को चूम रही है।

भाई,भाई का दुश्मन बन बैठा है ,
बेटा, बाप को लूटने की ताक में है,
माँ कलयुग को कोसे जा रही है ,
बेटी घर से भागने की 
फिराक में है।

लोर्ड क्रिस,अब तुम उतर भी आओ,
पाप का अन्धेरा घनघोर छा गया है !
यह आपके लटकने का वक्त नहीं  है ,
शठों को लटकाने का वक्त आ गया है।



Merry Christmas to all Blogger friends !

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22 Comments:

Blogger Unknown said...

"दौलत और सोहरत की चकाचौंध में,
सभ्यता निःवस्त्र घूम रही है !
संस्कृति बचाती लाज फिर रही,
बेशर्मी शिखर को चूम रही है !!"


बहुत ही सुन्दर गोदियाल जी!

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger परमजीत सिहँ बाली said...

कटाक्ष करती हुई एक बढ़िया सामयिक पोस्ट है।
बहुत बहुत बधाई गोदियाल जी।

भाई-भाई का दुश्मन बन बैठा,
बेटा, बाप को लूटने की फिराक में है!
माँ कलयुग को कोसे जा रही,
बेटी घर से भागने की ताक में है !!

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger M VERMA said...

संस्कृति बचाती लाज फिर रही,
बेशर्मी शिखर को चूम रही है !!
यथार्थ चित्रण -- भावपूर्ण

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

गौदियाल साहब ......... आपका HAPPY CHRISTMAS का अंदाज़ बहुत भाया .......... CHRIS KO बुला भी लिया और कटाक्ष भी कर दिया .........

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger vandana gupta said...

दौलत और सोहरत की चकाचौंध में,
सभ्यता निःवस्त्र घूम रही है !
संस्कृति बचाती लाज फिर रही,
बेशर्मी शिखर को चूम रही है !!
aaj ke yatharth par badhiya kataksh.

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

लोर्ड क्रिस अब उतर भी आओ,
चहुँ ओर पाप का अन्धेरा घनघोर छा गया है !
यह आपके लटकने का वक्त नहीं,
अपितु पापियों को लटकाने का वक्त आ गया है !!

मुझे भी यही लगता है, गोदियाल जी।
सही समय पर सही रचना। बधाई।

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger Dr. Zakir Ali Rajnish said...

Man ko chhoo jaane waalee abhivyakti.


--------
अंग्रेज़ी का तिलिस्म तोड़ने की माया।
पुरुषों के श्रेष्ठता के 'जींस' से कैसे निपटे नारी?

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger स्वप्न मञ्जूषा said...

गोदियाल साहब,
क्या लिखा है....
इस आह्वान पर कौन न दौड़ कर आएगा...
आज की रात ही यह ख्रिस कहीं न कहीं जनम जाएगा...!!

बहुत ही भावमयी कविता...ह्रदय को आंदोलित कर गई....

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

लोर्ड क्रिस अब उतर भी आओ,
चहुँ ओर पाप का अन्धेरा घनघोर छा गया है !
यह आपके लटकने का वक्त नहीं,
अपितु पापियों को लटकाने का वक्त आ गया है !!

क्रिसमस की बधाई!

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

कटाक्ष के साथ .... अच्छी लगी यह रचना....

मेरी क्रिसमस....

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger राज भाटिय़ा said...

भाई-भाई का दुश्मन बन बैठा,
बेटा, बाप को लूटने की फिराक में है!
माँ कलयुग को कोसे जा रही,
बेटी घर से भागने की ताक में है !!
बिलकुल सच लिखा आप ने धन्यवाद

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बेहद सटीक और सामयिक कविता. शुभकामनाएं.

रामराम.

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger विनोद कुमार पांडेय said...

नैतिकता ने दम तोड़ दिया कबके,
मानवीय मूल्य सबका ह्रास हो गया !
झूट की देहरी जगमग-जगमग,
दबा सच का आँगन कहीं घास हो गया !!

आज के परिवेश की स्थिति को समेटती हुई बहुत बढ़िया कविता..गोदियाल जी बहुत बढ़िया प्रस्तुति..

Thursday, 24 December, 2009  
Blogger RAJ SINH said...

सब जगह तुम..........
मंदिर हो ,मस्जिद,चर्च या गुरुद्वार हो .

मानवता का दस्तावेज है आपका लेखन , सिर्फ कविता नहीं .

Friday, 25 December, 2009  
Blogger RAJ SINH said...

सब जगह तुम..........
मंदिर हो ,मस्जिद,चर्च या गुरुद्वार हो .

मानवता का दस्तावेज है आपका लेखन , सिर्फ कविता नहीं .

Friday, 25 December, 2009  
Blogger वाणी गीत said...

सलीब पर लटके क्रिश को वर्तमान जगत की निर्ममता की ओर इशारा करती कविता ...
आभार ...!!

Friday, 25 December, 2009  
Blogger निर्मला कपिला said...

सर्वत्र तुम्ही विद्यमान हो, वो चाहे
मंदिर हो,मस्जिद, चर्च अथवा गुरुद्वारे हो !
आ जाओ क्रिस, अब आ भी जाओ,
तुम इस जग के रखवारे हो ! !
बहुत सुन्दर सन्देश देती रचना बधाई

Saturday, 26 December, 2009  
Blogger अजय कुमार said...

सार्थक प्रस्तुति

Monday, 28 December, 2009  
Blogger Dr. Shreesh K. Pathak said...

क्रिसमस पर एक अच्छी कविता...!

क्रिसमस की बधाइयाँ,गोदियाल साहब..!

Monday, 28 December, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

गोदियाल जी.... नमस्कार.... कैसे हैं आप?

Tuesday, 29 December, 2009  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहुत दिनों से कुछ लिखा नहीं आपने?

Tuesday, 29 December, 2009  
Blogger Murari Pareek said...

ghazab bhaai godiyaalji laazawaab!!!

Wednesday, 30 December, 2009  

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