Friday, March 18, 2011

मजेदार- पोलैंड में भगवान कृष्ण के खिलाफ केस!

(इसे आप अंगरेजी में गूगल सर्च पर भी ढूंढ सकते है )
दुनिया भर में तेजी से बढ़ता हिंदू धर्म का प्रभाव देखिये कि वारसॉ, पोलैंड में एक नन ने इस्कॉन (कृष्ण चेतना के लिए इंटरनेशनल सोसायटी) के खिलाफ एक मामला अदालत में दायर किया था ! नन ने अदालत में टिप्पणी की कि इस्कॉन अपनी गतिविधियों को पोलैंड और दुनियाभर में फैला रहा है, और पोलैंड में इस्कॉन ने अपने बहुत से अनुयायी तैयार कर लिए है ! अत: वह इस्कॉन पर प्रतिबन्ध चाहती है क्योंकि उसके अनुयायियों द्वारा उस 'कृष्णा' को महिमामंडित किया जा रहा है, जो ढीले चरित्र का था और जिसने १६,००० गोपियों से शादी कर रखी थी ! इस्कॉन के वकील ने न्यायाधीश से अनुरोध किया : "आप कृपया इस नन से वह शपथ दोहराने के लिए कहें, जो उसने नन बनते वक्त ली थी" न्यायाधीश ने नन से कहा कि वह जोर से वह शपथ सुनाये, लेकिन वह ऐसा नहीं करना चाहती थी ! फिर इस्कॉन के वकील ने खुद ही वह शपथ पढ़कर सुनाने की न्यायाधीश से अनुमति माँगी ! आगे बढ़ो, न्यायाधीश ने कहा ! उसने शपथ पढ़कर सुनाई, शपथ में यह है कि नन ने यीशु मसीह से शादी की है ! इस्कॉन के वकील ने कहा , "मी लोर्ड ! भगवान् कृष्ण पर तो सिर्फ यह आरोप है कि उन्होंने 16,000 गोपियों से शादी की थी, मगर दुनिया में दस लाख से भी अधिक नने हैं , जिन्होंने यह शपथ ली है कि उन्होंने यीशु मसीह से शादी कर रखी है! अब आप ही बताइये कि यीशु मसीह और श्री कृष्ण में से कौन अधिक लूज कैरेक्टर ( निम्न चरित्र ) हैं ? साथ ही ननो के चरित्र के बारे में आप क्या कहेंगे ? न्यायाधीश ने दलील सुनने के बाद मामले को खारिज कर दिया !



ना के अपना सगा ले गई थी,
मुझे मेरे घर से भगा ले गई थी,
गले मिलने की जिद पर उतरके ,
मुझसे दिल अपना लगा ले गई थी।  


जवाँ-गबरू गाँव का पढ़ा-लिखा,
शरीफ सा भोला-भाला जो दिखा,
माँ-बाप को मेरे दगा दे गई थी,
मुझे मेरे घर से भगा ले गई थी।  

अपनी ही दुनिया में खोया-खोया,
जमाने के रंगों से मैं बेखबर सोया,
पिचकारी मारके जगा ले गई थी,
मुझे मेरे घर से भगा ले गई थी।  

होली खेलन का तो इक बहाना था,
असल मकसद  ढूढना कान्हा था,
चतुरनार भोले को ठगा ले गई थी, 
मुझे मेरे घर से भगा ले गई थी !!



आप सभी को होली की ढेर सारी शुभकामनाये !

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31 Comments:

Blogger डॉ टी एस दराल said...

होली का तो बस इक बहाना था,
मकसद ढूढना तो इक कान्हा था,

हा हा हा ! इस बहाने पर कुर्बान !
होली की शुभकामनायें ।

कृष्ण प्रसंग आश्चर्यचकित करने वाला है ।

Friday, 18 March, 2011  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

अपनी तरह का एक मुकदमा

Friday, 18 March, 2011  
Blogger नीरज मुसाफ़िर said...

ओ तेरे की।
भैया हम तो अभी से ही ईसा मसीह के फैन हो गये हैं। दस लाख? कृष्ण तो सोलह हजार पर ही सिमट गया लेकिन ईसा तो अपनी गिनती बढाने पर लगा है।

Friday, 18 March, 2011  
Blogger kunwarji's said...

अनूठा रंग जोड़ दिया जी आपने इस बार की होली में....

कुंवर जी,

Friday, 18 March, 2011  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

मस्त फुहारें लेकर आया,
मौसम हँसी-ठिठोली का।
देख तमाशा होली का।।
--
होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Friday, 18 March, 2011  
Blogger ललित शर्मा said...

वाह वाह गोदियाल जी आपका अंदाज ही निराला है।

होली शुभकामना

Friday, 18 March, 2011  
Blogger vijai Rajbali Mathur said...

आप सब को भी होली की हार्दिक मंगलकामनाएं.

Friday, 18 March, 2011  
Blogger संजय भास्‍कर said...

उम्दा प्रस्तुति
रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को|

Friday, 18 March, 2011  
Blogger डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

वकील के दलील को नमस्कार .......... रंगों का त्यौहार बहुत मुबारक हो आपको और आपके परिवार को.............

Friday, 18 March, 2011  
Blogger सूबेदार said...

गोदियाल नमस्ते
बहुत अच्छी जानकारी दी अपने शीसे के मकान रखने वाले भी पत्थर चला रहे है वास्तव में इस्लाम और ईशाई दो में बड़ी ही घबडाहट है ,मुसलमान तो बहुत ही परेशान है क्यों कि जब-तक युरोशलम पर कब्ज़ा नहीं हो जाता तब-तक इस्लाम की सार्थकता सिद्ध नहीं होती ,आखिर यहूदियों को भी जिन्दा रहने का अधिकार तो है ही लेकिन विश्व के मुसलमान यहूदियों को शत्रु घोषित किये हुए है- कही ऐसा न ही की उब कर यहूदियों को मक्का व मदीना पर बम चलाना न पड़े तो क्या होगा?

Friday, 18 March, 2011  
Blogger राज भाटिय़ा said...

ननो के किस्से यहां बहुत होते हे जी, अब क्या बताये, वेसे भी यह गुस्से वालिया ओर झगडालू स्व्भाब की होती हे, बहुत कम नान अच्छी ओर मिलन सार होती हे, धन्यवाद
होली की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ!

Friday, 18 March, 2011  
Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

गजब का वकील था. होली की कविता भी बहुत अच्छी लगी..

Friday, 18 March, 2011  
Blogger VICHAAR SHOONYA said...

गोंदियल साहब अपने होली के अवसर पर बड़ा मजेदार किस्सा सुनाया है. आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनायें.

Friday, 18 March, 2011  
Blogger Taarkeshwar Giri said...

हाँ मैंने भी कल पंडित ढाबे पर जा करके के नान खाई मगर उसका स्वाद तो अलग था., खैर ईशा मशीह साहेब को होली कि बधाई और साथ में आप सबको,

कविता तो मस्त हैं,

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger Yashwant R. B. Mathur said...

आप को सपरिवार होली की हार्दिक शुभ कामनाएं.

सादर

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बहुत लाजवाब जानकारी.

होली पर्व की घणी रामराम.

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger Unknown said...

भजन करो भोजन करो गाओ ताल तरंग।
मन मेरो लागे रहे सब ब्लोगर के संग॥


होलिका (अपने अंतर के कलुष) के दहन और वसन्तोसव पर्व की शुभकामनाएँ!

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

रहिमन इस संसार में भांति भांति के लोग .. :):)

होली की शुभकामनायें

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger अजय कुमार said...

इनके कलुषित मन होली में साफ हो जायेंगे

सुरक्षित , शांतिपूर्ण और प्यार तथा उमंग में डूबी हुई होली की सतरंगी शुभकामनायें ।

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger vandana gupta said...

यहां तो होली की मस्त फ़ुहारें पड रही हैं……………आपको और आपके पूरे परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger Kailash Sharma said...

बहुत सुन्दर..होली की हार्दिक शुभकामनायें!

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger tension point said...

होली पर आप को परिवार के साथ शुभ कामनाएं ।
ये त्यौहार सबके जीवन में कमसेकम सौ बार आये ॥

इन ननों (कीचड़ के सनों) को आखिर शीशा दिखा ही दिया,
इसके लिए धन्यवाद |

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger Shah Nawaz said...

वाह बहुत बढ़िया जवाब!

आपको भी परिवार सहित होली की बहुत-बहुत मुबारकबाद... हार्दिक शुभकामनाएँ!

Saturday, 19 March, 2011  
Blogger अन्तर सोहिल said...

सचमुच मजेदार केस

प्रणाम स्वीकार करें

Sunday, 20 March, 2011  
Blogger राजकुमार ग्वालानी said...

रंगों की चलाई है हमने पिचकारी
रहे ने कोई झोली खाली
हमने हर झोली रंगने की
आज है कसम खाली

होली की रंग भरी शुभकामनाएँ

Sunday, 20 March, 2011  
Blogger BrijmohanShrivastava said...

होली का त्यौहार आपके सुखद जीवन और सुखी परिवार में और भी रंग विरंगी खुशयां बिखेरे यही कामना

Sunday, 20 March, 2011  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

गौडियाल जी ... आप हमेशा कुछ न कुछ मजेदार खबर लाते रहते हैं ... जे हो इस महिला नन की ...
आपको और समस्त परिवार को होली की हार्दिक बधाई और मंगल कामनाएँ ....

Sunday, 20 March, 2011  
Blogger Sulabh Jaiswal "सुलभ" said...

मजेदार, ये खबर तो पढ़ा था, लेकिन आपने अच्छे से समझा दिया.

आपको होली की बहुत बहुत शुभकामनाये!!

Sunday, 20 March, 2011  
Blogger Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

आदरणीय पी.सी.गोदियाल "परचेत" जी
सादर सस्नेहाभिवादन !
रंग भरा प्रणाम !

बहुत मजेदार रहा यह तो …लूज कैरेक्टर !

… और कविता भी कमाल !
वो पहली ही मर्तबा ले गई थी,
मुझे मेरे घर से भगा ले गई थी!


होली का तो बस इक बहाना था,
मकसद ढूढना रहा इक कान्हा था,
चतुरनार भोले को ठगा ले गई थी!

हाऽऽहाऽऽऽह ! सौदा घाटे का तो बिलकुल नहीं लगा … :)

मुबारक हो ! हार्दिक बधाई !


♥ होली की शुभकामनाएं ! मंगलकामनाएं !♥

होली ऐसी खेलिए , प्रेम का हो विस्तार !
मरुथल मन में बह उठे शीतल जल की धार !!


- राजेन्द्र स्वर्णकार

Monday, 21 March, 2011  
Blogger डॉ० डंडा लखनवी said...

भाई साहब!
जो भागना न चाहे उसे भगा कौन सकता है?
जो जागना न चाहे उसे जगा कौन सकता है??
मन की गहराई में कहीं न कहीं आपकी सहमति
जरूर छिपी थी। हा....हा....हा.....हा....हा......
ऐसा फागुन में ही संभव है।
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वह साड़ी में थी हरी - हरी।
रसभरी रसों से भरी - भरी॥
नैनों से डाका डाल गई-
बंदूक दग गई धरी - ध्ररी॥
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होली मुबारक़ हो। सद्भावी -डॉ० डंडा लखनवी
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Monday, 21 March, 2011  
Blogger लोकेन्द्र सिंह said...

नन की स्थति को ऐसी बन गयी की न तो उगलते बने और न निगलते....

Tuesday, 22 March, 2011  

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