Saturday, February 25, 2012

वक्त आयेगा एक दिन !

















छवि गूगल से साभार !


दिन आयेगा महफ़िल में जब, होंगे न हम एक दिन,
ख़त्म होकर रह जायेंगे सब, रंज-ओ-गम एक दिन।

नाम हमारा जुबाँ पे लाना, अखरता है अबतक जिन्हें ,
जिक्र आयेगा तो नयन उनके भी, होंगे नम एक दिन।

हमने तो वजूद को अपने , हर हाल में रखा कायम,
थक हार के खुद ही वो, बंद कर देंगे सितम एक दिन।

जख्मों को अपने हमने सदा,खरोचकर जीवित रखा ,
दिल पिघलेगा कभी , वो लगायेंगे मरहम एक दिन।

महंगी वसूली हमसे 'परचेत',कीमत हमारे शुकून की,
वक्त आयेगा जब भाव उनके भी होंगे कम एक दिन।

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19 Comments:

Blogger भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत खूबसूरत गजल कही...

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger dr.mahendrag said...

Nam mera juban pe lana jinhe wazib nahi lagta wohi.........
KHOOBSURAT GAZAL

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger रश्मि प्रभा... said...

ये सोचकर कि जख्म ज़िंदा रहें, उन्हें खरोचता रहा,
थक-हारकर फिर लगाने ही होंगे मरहम एक दिन।... आखिर दर्द सहने की भी हद तो होती है

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger Anupama Tripathi said...

महंगी वसूली हमसे 'परचेत',कीमत हमारे सुकून की,
वक्त आयेगा जब भाव उनके भी होंगे कम एक दिन।
satya kahati rachna ...

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger संध्या शर्मा said...

महंगी वसूली हमसे 'परचेत',कीमत हमारे सुकून की,
वक्त आयेगा जब भाव उनके भी होंगे कम एक दिन।
वाह... होगा एक दिन.. खूबसूरत गजल...

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

वाह वाह गोदियाल जी । बढ़िया ग़ज़ल लिखी है ।

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger Kailash Sharma said...

ये सोचकर कि जख्म ज़िंदा रहें, उन्हें खरोचता रहा,
थक-हारकर फिर लगाने ही होंगे मरहम एक दिन।

...वाह! बेहतरीन गज़ल जो दिल को छू जाती है..

Saturday, 25 February, 2012  
Blogger लोकेन्द्र सिंह said...

नाम मेरा जुबाँ पे लाना, जिन्हें वाजिब नहीं लगता,
जिक्र आयेगा तो नयन उनके भी होंगे नम एक दिन.......भावुक कर देने वाली प्रस्तुति।

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger virendra sharma said...

ढुलमुल यूँ इसतरह कबतक, चलती रहेगी जिन्दगी,
कुछ न कुछ सख्त तो उठाने ही होंगे कदम एक दिन।


महंगी वसूली हमसे 'परचेत',कीमत हमारे सुकून की,
वक्त आयेगा जब भाव उनके भी होंगे कम एक दिन।
बढ़िया ग़ज़ल बढ़िया संकल्प बिलाशक ज़िन्दगी 'सरकार 'की तरह ढुलमुल क्यों चले ,नाकारा क्यों रहे ?

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger vidya said...

वाह!!!!
बेहतरीन गज़ल.....

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

उस एक दिन की प्रतीक्षा न जाने कब से है..

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

शानदार प्रस्तुति...
सादर.

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger vandana gupta said...

ये सोचकर कि जख्म ज़िंदा रहें, उन्हें खरोचता रहा,
थक-हारकर फिर लगाने ही होंगे मरहम एक दिन।…………बहुत शानदार प्रस्तुति ।

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger Amrita Tanmay said...

खूबसूरत गजल..|

Sunday, 26 February, 2012  
Blogger ZEAL said...

महंगी वसूली हमसे 'परचेत',कीमत हमारे सुकून की,
वक्त आयेगा जब भाव उनके भी होंगे कम एक दिन..

waah !..Great lines Sir...Awesome !

.

Monday, 27 February, 2012  
Blogger संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बेहतरीन गजल

Monday, 27 February, 2012  
Blogger दिगम्बर नासवा said...

ढुलमुल यूँ इसतरह कबतक, चलती रहेगी जिन्दगी,
कुछ न कुछ सख्त तो उठाने ही होंगे कदम एक दिन।

काश ये शेर अपनी सरकार पढ़ ले ... और कुछ सुधर जाए ... बेहतरीन गज़ल है गौदियाल जी ...

Monday, 27 February, 2012  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत श्रेष्ठ और सटीक!

Tuesday, 28 February, 2012  
Blogger M VERMA said...

दिन आयेगा महफ़िल में जब, होंगे न हम एक दिन,
ख़त्म होकर रह जायेंगे सब रंज-ओ-गम एक दिन।
रंजो गम खत्म होंगे ही

सुन्दर गज़ल

Tuesday, 28 February, 2012  

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