Friday, July 5, 2013

आतुरता !

आगमन पर
मौसम-ए- बरसात,
अगर एक पौधा 

बरगद का जो मैं रोपूँ ,
तो 
हर कोई यही कहेगा;
'पागल है, नीलगिरि के रोप,
फायदे में रहेगा'।   

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9 Comments:

Blogger ताऊ रामपुरिया said...

बिल्कुल सही कहा आपने.

रामराम.

Friday, 05 July, 2013  
Blogger Harihar (विकेश कुमार बडोला) said...

कलिकाल बिहाल किए मनुजा, ना जानत है अनुजा तनुजा
लालच निचोड़ दिए मानव ममता, तब क्‍या बचत है भाईजा

Friday, 05 July, 2013  
Blogger kunwarji's said...

"बाजारवाद की इस अंधी दौड़ में, न जाने हर कोई क्यों इस कदर उतावला हो गया है।। "

bilkul sahi baat!

Friday, 05 July, 2013  
Blogger Kajal Kumar's Cartoons काजल कुमार के कार्टून said...

आज हर चीज़ के मायने नि‍कालने बहुत ज़रूरी हैं :-(

Friday, 05 July, 2013  
Blogger कविता रावत said...

हर चीज में मतलब जो देखने लगा है इंसान!

Friday, 05 July, 2013  
Blogger रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति है आदरणीय-
आभार आपका-

Friday, 05 July, 2013  
Blogger डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/ चर्चा मंच <a href=" पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

Friday, 05 July, 2013  
Blogger डॉ टी एस दराल said...

बहुत गहरी बात कही है।

Friday, 05 July, 2013  
Blogger प्रवीण पाण्डेय said...

दौड़ रहे सब, आगे निकलें,
अपने घर से भागें, दिख ले।

Sunday, 07 July, 2013  

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