कार्टून कुछ बोलता है- उत्तराखंड त्रासदी !
निकले तो थे गुपचुप दर्द बांटने
बाढ़ पीड़ितों का,
दर्मियाँ सफर तो भेद उनका
किसी पे उजागर न हुआ,
मगर खुला भी तो कब,
जब मंजिल पे वो पूछ बैठे;
"आखिर इस जगह हुआ क्या था ?"
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...............नमस्कार, जय हिंद !....... मेरी कहानियां, कविताएं,कार्टून गजल एवं समसामयिक लेख !
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7 Comments:
सुन्दर प्रस्तुतीकरण !!
ऐसा पूछने वालों को नमन
बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार
क्या कहें? काजल जी के शब्द ही दोहरा देते हैं "ऐसा पूछने वालों को नमन"
रामराम.
मार्मिक -
सटीक प्रस्तुति-
भावी युवराज माफ कीजिये देश के युवराज को हक है ये पूछने का ...
ट्रेलर समझ में नहीं आता है लोगों को और पूरी पिल्म देखने के बाद उसका विवरण देने के लिए कोई नहीं बचेगा।
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