कार्टून कुछ बोलता है- उत्तराखंड त्रासदी !
















निकले तो थे गुपचुप दर्द बांटने 
बाढ़ पीड़ितों का,  
दर्मियाँ सफर तो भेद उनका 
किसी पे उजागर न हुआ, 

 मगर खुला भी तो कब, 
जब मंजिल पे वो पूछ बैठे;  
"आखिर इस जगह हुआ क्या था ?"   

Comments

  1. सुन्दर प्रस्तुतीकरण !!

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  2. Replies
    1. बेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
      आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
      सादर...!
      शशि पुरवार

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  3. क्या कहें? काजल जी के शब्द ही दोहरा देते हैं "ऐसा पूछने वालों को नमन"

    रामराम.

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  4. मार्मिक -
    सटीक प्रस्तुति-

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  5. भावी युवराज माफ कीजिये देश के युवराज को हक है ये पूछने का ...

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  6. ट्रेलर समझ में नहीं आता है लोगों को और पूरी पिल्‍म देखने के बाद उसका विवरण देने के लिए कोई नहीं बचेगा।

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