यूं भी बावफा होते है लोग !
ये दिल निसार करके जाना कि राहे जफा होते है लोग, सच में, हमें मालूम न था कि यूं भी बावफा होते है लोग ! सोचते थे कि नेमत है खुदा की ये जज्बा , इल्म न था कि वफ़ा की कस्मे खाने वाले, इस कदर बेवफा होते है लोग ! दिल और आँख का ऐसा आपसी देखा जो समन्वय 'परचेत', नजर देखे, दिल शकूं पाए, मनीषी ऐसे ही नफ़ा होते है लोग !

सुन्दर प्रस्तुतीकरण !!
ReplyDeleteऐसा पूछने वालों को नमन
ReplyDeleteबेहद सुन्दर प्रस्तुति ....!
Deleteआपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा कल बुधवार (26-06-2013) के धरा की तड़प ..... कितना सहूँ मै .....! खुदा जाने ....!१२८८ ....! चर्चा मंच अंक-1288 पर भी होगी!
सादर...!
शशि पुरवार
क्या कहें? काजल जी के शब्द ही दोहरा देते हैं "ऐसा पूछने वालों को नमन"
ReplyDeleteरामराम.
मार्मिक -
ReplyDeleteसटीक प्रस्तुति-
भावी युवराज माफ कीजिये देश के युवराज को हक है ये पूछने का ...
ReplyDeleteट्रेलर समझ में नहीं आता है लोगों को और पूरी पिल्म देखने के बाद उसका विवरण देने के लिए कोई नहीं बचेगा।
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