आतुरता !
आगमन पर
मौसम-ए- बरसात,
अगर एक पौधा
बरगद का जो मैं रोपूँ ,
तो हर कोई यही कहेगा;
'पागल है, नीलगिरि के रोप,
फायदे में रहेगा'।
मौसम-ए- बरसात,
अगर एक पौधा
बरगद का जो मैं रोपूँ ,
तो हर कोई यही कहेगा;
'पागल है, नीलगिरि के रोप,
फायदे में रहेगा'।
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9 Comments:
बिल्कुल सही कहा आपने.
रामराम.
कलिकाल बिहाल किए मनुजा, ना जानत है अनुजा तनुजा
लालच निचोड़ दिए मानव ममता, तब क्या बचत है भाईजा
"बाजारवाद की इस अंधी दौड़ में, न जाने हर कोई क्यों इस कदर उतावला हो गया है।। "
bilkul sahi baat!
आज हर चीज़ के मायने निकालने बहुत ज़रूरी हैं :-(
हर चीज में मतलब जो देखने लगा है इंसान!
बढ़िया प्रस्तुति है आदरणीय-
आभार आपका-
बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार (06-07-2013) को <a href="http://charchamanch.blogspot.in/ चर्चा मंच <a href=" पर भी होगी!
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
बहुत गहरी बात कही है।
दौड़ रहे सब, आगे निकलें,
अपने घर से भागें, दिख ले।
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