अब चित्रकार द्बारा भयादोहन ( ब्लैक मेलिंग ) !
जहाँ तक कला की बात है, मैं चित्रकारी के विषय में बहुत ज्यादा ज्ञान तो नहीं रखता, मगर जितना कुछ रखता हूँ उसके आधार पर कह सकता हूँ कि निसंदेह हुसैन साहब एक अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चित्रकार है, चाहे वो जिस आधार पर भी बने हो! चूँकि आज स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी की पुण्य तिथि है, इसलिए मुझे याद आ रहा है कि एक जमाना था, जब ये हुसैन साहब स्वर्गीय गांधी को खुश करने हेतु और खुद को प्रकाश में लाने हेतु उनकी भिन्न-भिन्न दुर्गा रूपी तस्वीरे बनाया करते थे, और जब थोडा सा प्रसिद्धि पा ली, तो इन्होने दुर्गा को किस रूप में पेंट किया, किसी को बताने की जरुरत मैं नहीं समझता! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की दुहाई देकर अगर इस तरह दूसरे धर्मो की अवमानना की जाती है, उन्हें ठेस पहुंचाई जाती है, और साथ में यह भी कहते है कि लोगो को आधुनिक कला का ज्ञान नहीं है, इसलिए वे इन कलाकृतियों की महता नहीं समझ सकते, तो जनाव, आपके अपने धर्म में ही सुधार रूपी ऐसी कई कलाकृतियों की बहुत ज्यादा गुंजाइश है आप उस पर क्यों नहीं अपना हुनर दिखाते ? आपने एक पिक्चर भी बनाई थी, मुल्लाओ के ज़रा से विरोध के बाद उसे क्यों वापस ले लिया ? सीधा सा जबाब है कि जनाव दोगले है! ये जनाब जो आज वतन लौटने के लिए इतने बेताब है, इनसे पूछा जाए कि ये अगर इतने ही महान थे, और अपने वतन से प्यार करते थे, तो भागकर गए ही क्यों थे ?
खैर, इस बारे में तो पहले ही बहुत बहस हो चुकी, अत: मैं जो कहना चाहता था, वह यह कि ये जैसे भी हो, मगर अगर सरकार अपनी तुष्टीकरण निति के अन्दर इनकी मांगे मानती है, तो सार्वजनिक तौर पर उसका विरोध किया जाना चाहिए ! ये अपने वतन लौटे और कोई अपराध किया है तो यहाँ के कानूनों का सामना एक आम नागरिक की भांति करे, इनको स्पेशल दर्जा किस बात का ? जहां तक व्यक्तिगत सुरक्षा का सवाल है, इन्होने करोडो रूपये पेंटिंग बेच कर कमाए है, और इतनी हैसियत रखते है कि गार्डो की एक पूरी फौज अपने घर में रख सके, सरकार के खाते में सुरक्षा की जरुरत क्या है ?
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