पहेलियां जीवन की।

उत्कर्ष और अप्कर्ष, कहीं विसाद,कहीं हर्ष, अस्त होता आफताब, उदय होता माहताब, बहुत ही लाजवाब। कैंसी मौनावलंबी  ये इंसानी हयात , ...