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Showing posts from April, 2010

खुदा न करे कभी आपके भी कॉकरोच घुसे ! ( आप बीती )

कल मेरे ब्लॉग पर एक टिप्पणीकार ने निम्नलिखित टिपण्णी दी , तो सोचा क्यों न उनकी ख्वाइश के मुताविक आज मैं भी एक अच्छी पोस्ट लिख डालूँ ; Kumar Jaljala said... "महीने दो महीने में एकाध पोस्ट अच्छी भी लिखो करो गोदियाल साहब। सब लोग वेरी गुड-वेरी गुड कर सकते हैं क्योंकि आप इनकी पोस्टों पर जाकर वेरी गु़ड और हा... हा.. हा...करते हो। इससे ब्लाग जगत का कोई फायदा नहीं होने वाला। बाकी आपकी फोटो देखने से तो लगता है कि आप समझदार हो।" ये जनाव , वैसे तो जाने पहचाने और डाक्टर घोटा विरादरी के अच्छे लोगो में से सुमार है, और पहले भी ब्लॉग जगत पर अपनी किस्मत बहुत से फर्जी नामो जैसे राहुल, निखिल, रोहित इत्यादि से आजमा चुके है , लेकिन ख़ास सफलता इन्हें हासिल नहीं हुई ! आइये इसबार हम सब मिलकर खुदा से इनके लिए यह दुआ मांगे कि खुदा इन्हें सदबुद्धि दे, और ये एक सफल ब्लॉगर बने ! अब आपको अपनी एक आप बीती सुनाता हूँ ; सुबह तैयार होकर जब घर से दफ्तर या अपने किसी गंतव्य की और ड्राइव करते हुए निकलों तो शुरु होती है दिल्ली की भीड-भाड वाली सड़क, आगे-पीछे दांये-बाएं से रेंगती गाडिया, बायाँ हाथ गियर पर, दांया हाथ स...

आज देश को एक लौह पुरुष की दरकार है, किसी भले आदमी की नहीं !

पाकिस्तान के इस बयान का भले ही ज्यादा कुछ महत्व न हो , जिसमे उसने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी तो पाकिस्तान के साथ अच्छे सम्बन्ध बनाने के इच्छुक है, मगर कौंग्रेस पार्टी रोड़े अटका रही है ! पाकिस्तान क्या कह रहा है, उस बात को भले ही हमें ज्यादा अहमियत नहीं देनी चाहिए, मगर यह बात गौर करने लायक है कि उसके इस बयान के अन्दर सन्देश क्या छुपा है! इसे देश के लिए क्या समझे कि देश को प्रधानमंत्री के तौर पर मनमोहन सिंह जी जैसा "भला आदमी" मिला, जबकि आज देश को किसी भले आदमी की नहीं अपित किसी लौह पुरुष ( कृपया भूल से भी लौह पुरुष का आशय यहाँ पर आडवानी जी से न लें ) की जरुरत थी !यह बात किसी से छुपी नहीं कि देश में पिछले ५-७ सालों में भ्रष्टाचार, महंगाई और अराजकता ने अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले है, देश के किसी कोने में कहीं सुशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई ! यह स्थिति क्यों आती है ? साधारण सी बात है कि जब देश का नेतृत्व किसी भले आदमी के हाथों में हो, जो सिर्फ दिखावे के लिए देश की बजाय अपनी स्वच्छ छवि को ज्यादा अहमियत देता हो, तो निश्चित तौर पर फिर देश के लिए पैदा होता है शर्म-अल-शेख का ...

राजनीति का गड़बड़ झाला !

विपक्ष के कटौती प्रस्तावों के मामले में मायावती ने केंद्र सरकार को अपना समर्थन देकर कह लो या फिर यों कह लो कि केंद्र द्वारा मायावती का समर्थन लेकर, मौजूदा सरकार ने यह जतला दिया है कि वह कितनी वेवश और लाचार है! राजनीतिवाजों द्वारा हमारे इस लोकतंत्र का मजाक बना के रख दिया गया है ! फर्ज कीजिये कि देश के विभिन्न भागों के दस्यु गैंग , तस्कर, माफिया अपने छोटे-छोटे राजनैतिक दल बनाकर, अपने-अपने इलाकों में अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर प्रत्येक गैंग अपने दस-दस सदस्यों को जिताकर लोकसभा में भेजते है, और वहाँ पहुंचकर सभी गैंग मिलकर एक मिली-जुली सरकार बना डालते है, तो बन गई न दस्यु, डाकुओ की सरकार, होगया न लोकतंत्र का बंटाधार ! इसके बाद कोई भला कुछ कर सकता है ? कुछ नहीं, बड़े शान से, रौब और अधिकार के साथ ये गैंग देश के खजाने की चाबी लेकर माल पर आराम से हाथ साफ़ कर सकते है, बिना किसी रोकटोक के! यही है आज के इस दौर में लोकतंत्र की सच्चाई! जिनका अपना खुद का कोई ईमान न हो, वो भला देशवासियों को ईमान पर चलने की सलाह किस मुह दे सकते है? २० से २२ जुलाई २००८ को दिल्ली में यूपीए सरकार के पिछले दौर में अमेरिका से...

क्रिकेट प्रेमियों से एक सवाल !

मुझे नहीं मालूम कि अभी यह सवाल उठाना कितना तर्कसंगत अथवा जल्दबाजी वाली बात है ! मगर जैसे कि ख़बरें है और आरोप लगाए गए है, कल अगर यह पूर्ण सत्यापित हो जाता है कि आई पी एल के कुछ अथवा सभी मैच आईपीएल प्रवंधन के सदस्यों के निर्देश पर फिक्स थे ! आई पी एल के प्रवंधन को तो एक तरफ रख दीजिये, लेकिन दूसरी तरफ इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि उसमें खेलने वाले खिलाड़ियों की भी इसमें कोई न कोई भूमिका रही थी क्योंकि उन्होंने पैसे लेकर, ऊँची कीमतों में बिककर जनता और देश को धोखे में रखा ! एक ईमानदार सवाल यह है कि तो क्या तब यह सब जानने के बाद भी आप लोग इन खिलाड़ियों को वही मान-सम्मान, महान और पता नहीं क्या-क्या दर्जा देंगे, जो आजतक देते आये है? अथवा आपको तो सिर्फ अपने मनोरंजन से मतलब है, मैच में वो लोग क्या करते है, उससे आपको कोई सरोकार नहीं, कोई मतलब नहीं ?

आई पी एल ही क्या यहाँ तो सभी कुछ फिक्स है !

आजादी के बाद से ही हमारा यह देश विवादों और जांच में ही संतृप्त रहा ! अपनी सहूलियत और फायदे के हिसाब से हमने सब कुछ पहले से फिक्स करके रख छोड़ा ! अपना उल्लू सीधा करने के लिए कब किस विवाद को उठाना है, कब किस तरह जनता की आँखों में धूल झोंकनी है और मूर्खों को मूर्ख बनाना है, कब किस तल्वाचाट खबरिया माध्यम के मार्फ़त क्या खबर/ सन्देश लोगो तक पहुंचाना है, सब फिक्स है! यह भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए, यदि कल को हमको/ आपको यह सुनने को मिले कि २८ दिसंबर १८८५ को गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज, बोम्बे में ही यह भी फिक्स हो गया था कि इस देश को आजादी कब दी जायेगी ! आज देश की अनेको ज्वलंत समस्याओं को दरकिनार कर हरजगह आई पी एल ही छाया हुआ है! आपको याद होगा कि अभी कुछ महीनो पहले, वक्त की महता और कुछ लोगो की सहूलियत के हिसाब से कोड़ा प्रकरण भी इसी तरह छा गया था, उसके बाद उसका क्या हुआ कोई नहीं जानता, और न कोई पूछने की जुर्रत करना चाहता है! आज भी हरतरफ से प्रधानमंत्री, सुपर प्रधानमंत्री और वे सभी लोग, चाहे वे इसमें हिस्सेदार है अथवा नहीं, इस विवाद में सम्मिलित हो रहे है, जिन्हें अपनी रोटियाँ सेकनी है ! तसल्ल...

एक जरूरी पोस्ट, खासकर महिलाओं के लिए !

यों तो इस विषय पर अंगरेजी में नेट पर काफी जानकारी उपलब्ध है, साथ ही हमारे देश के अंगरेजी समाचार पत्रों में भी इसके बारे में छप चुका है ! मगर हिन्दी में इसके बारे में ढूँढने पर मुझे कुछ भी हासिल नहीं हुआ ! ( हो सकता है क़ि इस बारे में मैं गलत हूँ, मगर सच में मुझे ऐसी कोई जानकारी नेट पर नहीं दिखी ) फिर भी सोचा क़ि इसके बारे में हिंदी में भी जानकारी अपने ब्लॉग पर उपलब्ध कराऊं ! यह मुंबई पुलिस बल के एक सदस्य द्वारा मूलतः अंगरेजी में मेल से भेजा गया है ! आप लोगो से अनुरोध है क़ि इस जानकारी को सब लोग अपने जानने वालों, खासकर अपनी पत्नी, बहनों, बेटियों, भतीजियों, माँ, महिला मित्रों और सहकर्मियों के साथ साझा करें ! एक पेट्रोल पंप पर, एक आदमी आया और उसने कार में पेट्रोल भरवाती एक महिला को अपना परिचय एक चित्रकार के रूप में देकर अपनी सेवाओं की पेशकश की , और उस महिला को अपना बिजनेस / विजिटिंग कार्ड थमाया ! उस महिला ने कुछ नहीं कहा. लेकिन सरासर आग्रह और आदरपूर्ण ढंग से पकडाए गए उस कार्ड को उसने स्वीकार किया और अपनी कार के डैशबोर्ड पर रख दिया! इसके बाद वह आदमी एक अन्य व्यक्ति के द्वारा संचालित कार मे...

किसी सज्जन ने अपने इस भाई की सुद ली ?

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जैसा कि आप सभी जानते है कि हाल ही में आइसलैंड के ज्वालामुखी विस्फोट ने पूरे यूरोप में ही नही बल्कि दुनियाभर में तहलका मचा दिया ! समय बलवान होता है, अत: सभी कुछ शनै:-शनै: सामान्य स्थिति में आ जाएगा ! लेकिन जिस रोज यह घटना घटी , मेरे जहन में सर्वप्रथम उपरोक्त क्लस्टर मानचित्र ही कौंधा ! और कौंध गया यह सवाल कि अपना वह हिन्दुस्तानी भाई किन परिस्थितियों में होगा, जो रोजी-रोटी के खातिर अपनी माटी से दूर उस निर्जन बर्फीले प्रदेश में रहता है ? इस दौरान वह सज्जन किस मानसिक तनाव से गुजर रहे होंगे , हम महसूस कर सकते है ! आइये, हम सब मिलकर यह कामना करें कि वे जो कोई भी हों, अगर इस हादसे के वक्त वहाँ पर ही रहे हों, तो सुरक्षित और सकुशल होंगे, और भगवान् उन्हें सुखमय लम्बी उम्र दे !

लघु व्यंग्य- इंडियन पापी लीग !

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खुशखबरी है साहब ! आजकल कुछ समय से मैंने भी सोचना शुरू कर दिया है, और इसी सोचने का परिणाम है यह धांसू आइडिया । मैंने सोचा, सोचा क्या ये समझो पक्का इरादा कर लिया है कि बड़े-बड़े तर गए, अपने मौन सिंह जी के शब्दों में कहे तो 'बिग फिश', बोले तो बड़ी मछलियां, कमा-धमा के इस देश से, वो बात और है कि उस कमाई पर ब्याज स्वीटजरलैंड वाले खा रहे है। अब हम भले ही बड़ी मछली न हों , मगर मेंडक के काले-काले बच्चों की तरह जमुना जी के गंदले पानी में अपनी काली पूँछ हिलाकर और हाथ-पैर मारकर , हम भी अपनी दो-चार पुश्तों का भला कर ले, तो बुराई क्या है? अत: अत्यंत हर्ष के साथ हम आपको सूचित करते है कि हमने भी एक नई कंपनी फ्लोट करने का आवेदन कंसर्न डिपार्टमेंट को भेजने का पक्का मन बना लिया है। सोच रहा हूँ कि कंपनी का मुख्य बिजनेस (खेल) होगा "गिल्ली-डंडा", कम्पनी का नाम रखूंगा, 'इंडियन पापी लीग'! देश के जितने भी पापी इस कंपनी के शेयर होल्डर बनना चाहे, बन सकते है । 'मोटो' होगा " मैं तर लूं , तू तब कूदना "। अब आप कहोगे कि कंपनी का ऐसा नाम रखने की ख़ास वजह क्या है? अरे जनाव, नाम...

ये है विश्व बंधुत्व की एक और मिसाल !

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हमारा धर्म सर्वश्रेष्ठ है, वह हमको शान्ति और विश्व बंधुत्व (धर्म विशेष का ) का मार्ग दिखलाता / सिखलाता है, यही एक सच्चा धर्म है, बाकी सब धर्म झूठे है, तुच्छ है, जो भी इस धर्म को अपनाता है, ऊपरवाला उसे सीधे ऊपर अपने पास ही नैसर्गिक सुखों को भोगने के लिए बुला भेजता है....इत्यादि, इत्यादि, ये दावे तो अक्सर आप लोग भी रोज ही किस्से-कहानियों और महापुरुषों के उपदेशों में भी पढ़ते-सुनते होंगे। कल ही ईरान में तो ऐसे एक महापुरुष जोकि आगे चलकर धर्मान्धो के पथ-प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते है, ने यहाँ तक दावा कर डाला कि औरतों के ठीक से कपडे न पहनने से भूकंप आते है। अब आपको इस ख़ास विश्व बंधुत्व की एक और घिनोनी मिसाल दिखाते है कि किस तरह जहां ये बहुसंख्यक होते है, और जब इन्हें किसी और धर्म का बकरा हलाल करने हेतु नहीं मिलता, तो ये जाति और रंगभेद का सहारा लेकर अपने ही धर्म के बकरे को हलाल कर डालते है। अमेरिका, रूस और चीन के लिए सामरिक दृष्ठि से महत्वपूर्ण किर्गिज़स्तान, जोकि पहले सोबियत संघ का एक हिस्सा था, आज मध्य एशिया में स्थित एक लोकतांत्रिक देश है। चारों तरफ जमीन और पहाड़ियों से घिरे इ...

महानगरीय चिड़ियाओं का दर्द !

प्रात: भ्रमण के उपरान्त बरामदे में बैठ बस यूँ ही शून्य को निहार रहा था कि सहसा नजर चिड़ियाओं का कोलाहल सुनकर सामने पार्क के एक छोर पर लड़ रही कुछ चिड़ियाओं पर जा टिकी। उनके व्यवहार से लग रहा था कि वे एक दूसरे को मरने-मारने पर उतारू है। बहुत देर तक उन्हें ही निहारता रहा। और स्थित तब जाके कुछ स्पष्ट हुई, जब पार्के के कोने पर स्थित एकमात्र छोटे से नीम के पेड़ पर वे सभी उड़कर आई। यह लड़ाई एक घोसले के लिए चल रही थी। दिलो - दिमाग को कुछ पल यह सोच कर बड़ा कष्ट हुआ क़ि हम स्वार्थी इंसानों ने कितनों के घर उजाड़ दिए अपना घर बसाने के चक्कर में। यह सोचकर थोड़ा गुस्सा भी आया कि हम, हमारी सरकार और हमारे कुछ तथाकथित पर्यावरणविद, जानवरों और परिंदों के नित लुप्त होते संसार का रोना तो बहुत रो लेते है , मगर इनका घर बसाने की कभी किसी ने कोई सार्थक पहल करनी तो दूर , इस बारे में सोचने तक की जुर्रत नहीं की कि हमारे थोड़े से प्रयास से कैसे हम इन्हें अपनी भावी पीढ़ियों के लिए बचा कर सकते है। धिक्कार है ऐंसी स्वार्थी इंसान प्रजाति के लिए, जो एक अदद दीमाग होने के बावजूद भी सिर्फ अपने लिए ही सोचती है। अभी सालभर पहले ...

कुदरत और इंसान !

शुरू करने से पहले आप सभी मित्रों से अनुरोध करूंगा कि इस गोगूल अनुवाद की सुविधा के बारे में आप गोगुल को सूचित करें कि यह एक निहायत घटिया किस्म की सेवा गूगुल द्वारा प्रदत है , क्योंकि यह अक्सर एक पूरे लिखे लेख की भी ऐंसी-तैंसी कर देता है ; there is a probleM send or don't send option दिखाकर ! मेरा आज एक लंबा-चौड़ा आलेख इस ट्रांसलिटरेशन ने मिट्टी में मिला दिया, अगर ये गूगुल वाले ठीक से कोई सर्विस प्रोवाइड नहीं कर सकते तो दूकान क्यों खोले बैठे है ? अब मुख्य बात पर आता हूँ ; आज जब सुबह-सबेरे "अपनत्व ब्लॉग" पर एक ख़ूबसूरत सी कविता पढी ज्वालामुखी विस्फोट के बारे में , तो दिल किया कि अपने कटु अनुभवों को भी आप के साथ शेयर करूँ ! यूँ तो आज इंसान बहुत बड़ी-बड़ी बाते करता है, अमेरिका अपने को सुपर पावर कहता है, मगर हकीकत है, आइस लैंड का ज्वालामुखी ! सब बेबस !!!! मेरे एक करीबी जानने वाले जो कि कनाडा के नागरिक है(एन आर आई ), ओंटोरियो प्रांत के मिस्सिस्सुगा में रहते है और भारत में अपना बिजनेस करते है , उनकी बेटी , जो कि लन्दन में नौकरी करती है और अकेली रहती है , की शादी २३ अप्रेल को तय थी !...

आई पी एल- क्या सच क्या झूठ !

जनता बेवकूफ है, तभी तो उच्चपदस्थ मुट्ठी भर लोग इन्हें मूर्ख बनाने में सक्षम है। कुछ लोग कह रहे है कि अब आई पी एल का सच सामने आने वाला है, मैं कहता हूँ जो चीज झूठ की ही बुनियाद पर खडी थी, उसका अब क्या सच सामने आयेगा? कुछ भ्रष्ट लोगो के लिए यह देश आज भी सोने की चिड़िया ही है, क्योंकि यह चिड़िया इन मूर्ख देशवासियों की जेबों से उड़कर उनके पास जाती है। एक सैनिक जिसने देश की चौकसी में उम्र गुजार दी, उसकी मृत्यु पर हम इसलिए मुआवजा नहीं देना चाह रहे कि उसकी मौत शायद हार्ट अटैक से हुई थी और दूसरी तरफ इस देश के लोगो की जेबों से इतना धन बर्षा कि सचिन और धोनी रातों-रात अरबपति बन बैठे। हम उन्हें भगवान मान बैठे। सता पे काबिज इन लोगो को जब अपनी कुर्सी पर आंच आती नजर आई तो अब यह सब ड्रामा लोगो की आँखों में धुल झोंकने के लिए शुरू हुआ , क्या इन्हें या इनकम टैक्स को कल तक यह बात मालूम नहीं थी ? जब तक लूट सको लूटो बस यही सिद्धांत बनकर रह गया, उसके बाद जांच बिठा दो जनता की तस्सली के लिए। कोड़ा का क्या हुआ ? १९८४ के दंगो का क्या हुआ? उसके बाद जो भी घटनाएं, घोटाले घटे, उनकी जांच का क्या हुआ? हम कहते है कि रा...

बस एक ख़याल यूँ ही...

मजहब और खुदा का वास्ता देकर लगातार झूठ पर झूठ, और फिर सब कुछ कबूल ! हम तो यह भी नहीं पूछते कि पहले क्यों ना-नुकुर कर रहे थे जनाब ?और बन्दे की हिम्मत देखिये, अपने दुश्मन देश की पहले एक लडकी को बीबी बनाया, ऐश किये और फिर तलाक देकर, चौड़ा होकर दूसरी लडकी को बीबी बनाने ले जा रहा है! और लोग तथा मीडिया ७६ जवानो की निर्मम ह्त्या की खबर को अनदेखा कर उसकी खातिरदारी और प्रचार (टी आर पी ) में जुटे है! फर्ज कीजिये कि अगर शोएब भारतीय होता और आयशा-सानिया पाकिस्तानी , और यही कुछ उस वक्त भी होता तो क्या उसके वहाँ से सही-सलामत लौट आने की उम्मीद की जा सकती थी ? बस इतना ही कहूंगा कि धन्य है...............!!!

क्या इससे देश को ख़तरा नहीं ?

सत्ता पर काविज नेतावों की तो खैर जुबां की कोई कीमत नहीं रही , मगर अभी कुछ समय पहले देश के थल-सेनाध्यक्ष जनरल वी के सिंह ने कहा था कि "The Naxalite problem is a law and order problem, which is a state subject not army problem " आज वायु सेनाध्यक्ष पीवी नाईक ने कहा " "Therefore, I am not in favour of use of Air Force in situations like the Naxal problem," देश के अर्धसैनिक बलों को न तो पूर्ण प्रशिक्षित इस नक्सल- माओ कायरता से निपटने के लिए किया गया है और न उन्हें आधुनिक हथियार मुहैया कराये गए है, कल की घटना इसका जीता जागता उदाहरण है, जिसमे देश ने अपने बेशकीमती ( नेताओं और माओआंकाओ के लिए तो कीड़े मकोड़े है ये लोग ) ८० के आसपास जवानो को बेवजह मौत के मुह में धकेल दिया ! तो अब मैं कुछ सवाल इस देश के अपने बुद्धिजीवी वर्ग से पूछना चाहूँगा; १. एक समय में एक अकेले डाकू मान सिंह को मारने के लिए सेना ( गोरखा रेजिमेंट के जवान बाबर सिंह थापा के नेतृत्व में ) पी.ए. सी के रूप में झोंक दिए गए ! २. पंजाब में जनरैल सिंह भिंडरवाला के लिए पूरी सेना की बटालियन ही झोंक दी गई ! ३. ...

सुनहरे तिलिस्म टूटे है !

गली वीरां-वीरां सी क्यों है, उखड़े-उखड़े क्यों खूंटे है, आसमां को तकते नजर पूछे, ये सितारे क्यों रूठे है।  डरी-डरी सी सूरत बता रही, महीन कांच के टुकडो की, कुपित सुरीले कंठ से कहीं  कुछ, कड़क अल्फाज फूटे है।  फर्श पर बिखरा चौका-बर्तन, आहते पडा चाक-बेलन, देखकर इनको कौन कहेगा कि ये बेजुबाँ सब झूठे है।  पटक देतीं है हर चीज, जो पड़ जाए कर-कमल उनके,   वाअल्लाह, बेरुखी-इजहार के उनके, अंदाज ही अनूठे है।  तनिक  हम  प्यार में  'परचेत' ,  मनुहार मिलाना  भूल गए, फकत इतने भर से ख़्वाबों के, सुनहरे तिलिस्म टूटे है। 

भगवान् उनके परिजनों को इस दर्द को सहने की शक्ति दे !

आज यह बड़े दुःख की बात है कि हमारे देश के भीतर ही मौजूद गद्दारों ने छत्तीसगढ़ में सी आर पी एफ के ७० से ज्यादा हमारे जवानो को मौत के घाट उतार दिया ! पता नहीं कब तक ये रोजी-रोटी के भूखे हमारे पढ़े-लिखे नौजवान इसतरह सत्ता पर काविज और परदे के पीछे छिपे बैठे चोर-चोर मौसेरे भाइयों द्वारा खेले जा रहे गंदे खेल में बेमौत मरते रहेंगे! जितने जवानो को इन कायर बुद्धिविहीन लोगो ने सियासत के गंदे खेल में अपने पिछड़ेपन और सरकार द्वारा उपेक्षा की आड़ में पिछले चंद सालों में मार डाला, उतने जवान तो कारगिल युद्ध में भी नहीं मरे थे! पता नहीं कुछ नपुन्शकों को कब शर्म आयेगी ! भगवन उन बेसहाय गरीब जवानो के परिवारों को इस कष्ट को झेलने की शक्ति दे !

ब्लोगर मित्रों से एक अनुभव शेयर करना चाहूंगा !

आज सुबह करीब ११.१५ बजे से मैंने नोट किया कि मेरे ब्लॉग पर जो भी कोमेंट थे, उनमे से कुछ गायब थे! उदाहरण के लिए मेरा ब्लॉग मेरे कल के लेख पर १४ टिप्पणिया होने की सूचना देता है, जबकि यदि ब्लॉग खोलू तो सिर्फ दस ही है ! मैंने एंटी वायरस भी चला के देख लिया, हो सकता है कि यह ब्लॉग की ही कोई कमी हो! मैंने बहुत याद करने की कोशिश की कि क्या हुआ होगा, क्योंकि सुबह तो पूरी टिप्पणिया मौजूद थी ! मैंने किसी वायरस वाली चीज को तो नहीं छेड़ा, तो मुझे याद आया कि कल मेरे एक लेख पर सिंगापुर से किसी सज्जन की टिपण्णी अंगरेजी में आई थी , जिसमे उन्होंने एक हीरो होंडा से सम्बंधित एक विज्ञापन का वीडियो लिंक दिया था, और लिखा था कि चूँकि यह विज्ञापन आपतिजनक है और आप हिंदी के एक अच्छे ब्लोगर है, इस लिए इसके खिलाफ आप अपने ब्लॉग पर लेख लिख लोगो को जागरूक करे !मैंने सुबह तकरीबन ११ बजे वह वीडियो देखने के लिए खोला , लेकिन व्यस्तता की वजह से जल्दी बंद कर दिया ! मैं दावे के साथ तो यह नहीं कह सकता कि उसी वीडियो के खोलने के बाद मुझे यह समस्या महसूस हुई, मगर आप लोगो को भी इस बारे में जानकारी देना अपना फर्ज समझता हूँ, ताकि अ...

लघु व्यंग्य - ताकि अब और कोई भैंस पानी में न जाए !

बहुत दिनों से ग्वालो और चरवाहों को बस यही बात खाए जा रही थी कि आखिर भैंस के पानी में जाने की वजह क्या थी? भैंस अपने चौबारे से बिदकी क्यों? घर में सब कुछ था, न सिर्फ महाजन बल्कि पूरा गाँव ही उसे रोज हरी-हरी घास खाने को देता था। महाजन ने घर में ही उसके लिए स्वीमिंग पुल की भी व्यवस्था की हुई थी। गाँव का एक शरीफ भैंसा भी कुछ दिनों तक उसके इर्द-गिर्द घूमा फिरा था, फिर आखिर क्या वजह थी कि भैंस ने पानी में उतरने का इतना मजबूत फैसला लिया? जबसे इस बात का खुलासा हुआ है कि इसकी असली वजह उस पार के गाँव का दिल फ़ेंक आवारा भैंसा है, तभी से नदी के आर-पार के दोनों गाँवों के बीच में उसी बात की गरमागरम चर्चा हो रही है। कुंए पर पानी लेने इकट्ठा हुई गाँव की कुछ औरतों को तो यहाँ तक कहते सुना गया कि कलमु.... का गंगापार के भैसे से पहले से ही चक्कर चल रहा था, इसलिए उसने गाम के शरीफ भैसे को छोड़ दिया। कुछ कहती थी कि हमें इन बातों में नहीं पड़ना चाहिए, क्योंकि वह निहायत ही उसका पर्सनल मामला है। उसकी मर्जी वह जिससे चक्कर चलाये। कुछ जो समझदार किस्म की थी उनका मत था कि गाम के लोग कितने मूरख है, बेफालतू एक अदनी सी भै...

जनगणना मे यह जानकारी भी ली जानी चाहिये थी…

जैसा कि सभी जानते है कि देश में जनगणना का काम एक अप्रैल से शुरु हो चुका है। इस बार इस जनगणना मे भरे जाने वाले फ़ार्म मे एक आम नागरिक के जीवन से समबन्धित बहुत सी बातों की जानकारी लेने का प्रयासकिया जा रहा है। साथ ही मगर मेरा यह भी मानना था कि क्या ही अच्छा होता कि सरकार यह भी इस जन गणना के माध्यम से जानने का प्रयास करती कि दूसरों को बडे-बडे उपदेश देने वाले हमारे इन भ्रष्ठ प्रजाति के प्राणि की मलीन बस्तियों से देश रक्षा का जज्बा लेकर राजनीतिक नेतावों के कितने बच्चे पिछले दस सालों मे सेना मे गए? मातृ - रुंधन चाहे गुहार समझो मेरी, या समझ लो इसे दृढ ऐलान, न दूंगी अब एक भी सपूत अपना तुम्हें करने को देश पर बलिदान । एक तरफ़ तो सेना मे अफ़सरों की कमी का रोना रो रहे, दूसरी तरफ़ उन्हे घटिया हथियार और निरन्तर मिग दुर्घटनाओं मे खो रहे। देश मे व्याप्त लूट-भ्रष्ठाचारी का कर न दोगे जब तक निदान , न दूंगी तब तक एक भी सपूत अपना तुम्हें करने को देश पर बलिदान । अपना तो तुम्हारा कुटिल,कपटी, कपूत नित हर रहा द्रोपदी के चीर को, और पेंशन को भी मोह्ताज कर दिया, देश रक्षा करने वाले ...

सेक्युलर खबरे और भेद-भाव पूर्ण मुस्लिम मानसिकता !

जैसा कि आप जानते ही है कि हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात यानि यूएई की शरिया कोर्ट ने 28 मार्च २०१० को 17 भारतीयों को फांसी की सजा सुनाई है। 17 भारतीयों को एक पाकिस्तानी नागरिक की हत्या के जुर्म में मौत की सज़ा सुनाई गई है। कोर्ट ने ये फ़ैसला 2009 के एक मुक़दमे में सुनाया है। 17 भारतीयों पर आरोप था कि उन्होंने शराब के ग़ैर क़ानूनी कारोबार पर अपना क़ब्ज़ा जमाने के लिए एक झगड़े में एक पाकिस्तानी नागरिक की लोहे की छड से मारकर हत्या कर दी थी।यूएई में पहली बार अदालत की ओर से किसी एक मामले में इतने लोगों को मौत की सज़ा दी गई है। वर्ष 2009 के जनवरी में शारजाह के अल-सजाह नामक स्थान पर भारतीयों और पाकिस्तानी नागरिकों के बीच ग़ैर क़ानूनी शराब के धंधे को लेकर वर्चस्व की लड़ाई हुई थी। इस लड़ाई में पाकिस्तानी नागरिक पर लोहे की छड़ से हमला किया गया था, ये लोग वहां मज़दूरी करने गए थे।फैसला आने के बाद सरकार जागी जरूर, मगर देर से। इससे पहले वहाँ स्थित सरकारी दूतावास क्या कर रहा था, क्या कभी उन्होंने इन लोगो की सुद लेने की कोशिश की? मुजरिम भले ही किसी भी धर्म-सम्प्रदाय का हो उसे देश के कानूनों के मुताविक ...

गिद्ध दृष्ठि अब सफ़ेद हाथी के अस्थि-पंजरों पर !

'कॉमन वेल्थ' यानि जतो नाम ततो गुण! सचमुच कुछ लोगो के लिए तो यह मानो हड़पने हेतु कॉमन वेल्थ जैसी ही है। यह किसी की व्यक्तिगत वेल्थ नहीं, बस कॉमन वेल्थ है। देश ने कॉमन वेल्थ के नाम से जिस सफ़ेद हाथी को पाला था। जब यह पैदा हुआ था तो लोगो को इसके माध्यम से बड़े-बड़े सब्जबाग दिखाए गए थे। उन्हें इसकी पीठ पर बिठाकर दिल्ली में सरपट दौड़ाने के ख्वाब दिखाए गए थे, दिल्ली वाले भी खूब उत्साहित थे, मगर इन फस्ट अप्रैल के मारों को ये नहीं मालूम था कि हाथी खरीदना आसान है, पालना मुश्किल। यहाँ की सडको पर हाथी तो क्या चूहा भी सरपट नहीं भाग पा रहा । हाँ , जनता के पैसों और जान की कीमत पर इन्होने जिस सफ़ेद हाथी को पाला पोसा और बड़ा किया, उसे ये खुद ही नोचने लगे है। स्थिति यह है कि अब वह भी मरियल सा हो गया है। इन्हें मालूम है कि मरा हुआ हाथी भी लाख का होता है, मांस में जब ख़ास कुछ नहीं बचेगा तो गिद्ध दृष्ठि अभी से अस्थि-पंजरों पर चली गई है। और कॉमन वेल्थ खेल गाँव में जो दो कमरों का फ्लैट आम जनता के लिए एक करोड़ के आस पास का रखा गया था, सुना है कि वहां पर उससे भी उच्च स्तर का फ्लैट निकट भविष्य में इन्हें म...

गुड फ्राई डे !

आज इस सुअवसर पर दो आड़ी तिरछी कविता की लाइने लोर्ड जीसस के नाम ; I'm a Hindu, but still I think I'm not much different from the people of your community. Yes Jesus, I respect you and love to read your autobiography because it is full of life and sacrifice for humanity. I know, on this day people commemorate your suffering, and death on the cross, I wish you a Blessed Good Friday!

(कु)शिक्षा का मौलिक अधिकार !

नित नए नियम और क़ानून बनाने में माहिर हमारी सरकार ने आज इस दिशा में एक और सीढी पार कर ली है। जब हमारे भ्रष्ट नेतावो और नौकरशाहों की किसी एक क़ानून से कमाई बंद हो जाती है, तो वे झठ से दूसरा क़ानून बना डालते है। आजादी के इन ६०-६५ सालों में इस देश के अरबों, खरबों रुपये सिर्फ शिक्षा के नाम पर गरीब बच्चो के स्कूल में हाजिरी लगाने के एवज में उन्हें नकद प्रोत्साहन देने, मिड डे मील, आँगनबाडी और उसके बाद कुछ साल पहले सर्वशिक्षा अभियान, जिसका लक्ष्य 5 से 14 साल के बच्चों को 2010 तक उपयोगी और प्रासंगिक प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना था, साथ ही स्कूलों को प्रबंध में समुदाय की सक्रिय सहभागिता सहित सामाजिक, क्षेत्रीय और लैंगिक विषमताओं को पाटने का एक दूसरा लक्ष्य भी था, खर्च कर दिए गए। स्कूलों के प्रबंध में समुदाय की सक्रिय सहभागिता की पोल तब खुल गई जब कल गाजियाबाद के एक निजी स्कूल ने २५० छात्रों को बढी हुई फीस न देने पर स्कूल से निकालने का फरमान जारी कर दिया, और जिसके एवज में भड़के अभिभावकों ने जोरदार हंगामा मचाया। किसी सरकारी अफसर और राजनेता ने स्कूल प्रशासन से तब यह पूछा कि क्या हुआ उस सर्व शिक्षा अभि...