दास्ताने टेररिस्तान !
नाम पाक, मंसूबे नापाक,
लत संत्रास स्वाद की,
सब झूठे,मक्कार, स्तुति करूँ क्या
किसी एक-आद की !
पिद्दीभर एबटाबाद तो अपना
इनसे सम्भाला न गया,
और कंगले, बात करते फिरते थे
हमारे अहमदाबाद की !!
बीज जैसा, पौध वैसी,
उसपर खुराक द्वेष-खाद की,
उसपर खुराक द्वेष-खाद की,
छीनकर दुनिया का अमन-चैन,
सुख-शांति बर्बाद की !
कांटे खुद बोये,दोष हमें दिया,
अरे कायरों ! हम तुमसा
दाऊद-ओसामा नहीं पालते,
ये भूमि है गांधी, बोष,
राजगुरु, भगतसिंह, आजाद की !!
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16 Comments:
सही कहा आपने गौदियाल जी ... अपना तो संभलता नही ... दूसरों को बात करते हैं ... नापाकी पाकी ...
बिल्कुल सही बात कही।
बहुत ही जोश से भरी रचना।
और गीदड़ -भपकियाँ देने में सबसे आगे ,
पता नहीं कब तक धरती पर बोझ-से रहेंगे ये अभागे?
उनके बारे में उनकी राय पूछ कर देखियेगा गोदियाल साहब, मजा आ जायेगा।
यह टैरिस्तान की दास्तान तो बिल्कुल खरी उतरती है जनाब!
पाकिस्तान की मौजूदा हालात पर एक तीखी प्रतिक्रिया...... आपका अंदाज ही कुछ ऐसा है गोदियाल जी कि, ऐबटाबाद क्या पेशावर तक भी आपकी हुंकार सुनाई दे... आभार ! अनेकानेक शुभकामनाओं सहित.
सच कहा, सच सामने आ गया है।
एक दम सटीक लिखा आप ने, सहमत हे जी, धन्यवाद
पर भैया, दाऊद तो इसी खाद की पीक है :)
Amerika aur China ke sahaare khada hai ye kenchua Pakistan
आदरणीय गौदियाल जी
नमस्कार !
...सही कहा आपने सहमत है
कई दिनों व्यस्त होने के कारण ब्लॉग पर नहीं आ सका
अरे कायरों ! हम तुमसा
दाऊद-ओसामा नहीं पालते,
ये भूमि है गांधी, बोष,
राजगुरु, भगतसिंह, आजाद की !!
...एक दम सटीक बात कही आपने..
शुभकामनाओं सहित!
वाह-वाह... सटीक बात कही... लेकिन हमारे देश के नेता भी इन बातों को नहीं जानते..
वाह! जोश बनायें रखें |
जो दिल ने कहा ,लिखा वहाँ
पढिये, आप के लिये;मैंने यहाँ:-
http://ashokakela.blogspot.com/2011/05/blog-post_1808.html
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