तहक़ीक़ात अभी जारी है

रिश्तों की खाइयों को पाटिये कि अब और न बढ़ें, दिलों के सहरा में नजर आ रही दरार बहुत भारी है, अगम्य राह, सत्य का पथ इतना दुर्गम कैसे हो गया, ...