दोगलापन !
मलिंगा, विश्व कप फ़ाइनल मैच से पहले और मैच के बाद;
वाह भई, शाहिद अफ्रीदी,
तेरा भी ईमान डोल गया,
यहाँ आकर झूठ बोला,
वहाँ जाके तू सच बोल गया !
देख,कितना गिरा देती है
इंसान को, नीयत डोलकर,
बीसियों झूठ बोलने पड़ते है,
फिर एक झूठ बोलकर !
मुह लगाते न तुम जैसों को,
गर हम बड़े दिलवाले होते,
न असुर मूंग दलता छाती,
न राज करते हम पर खोते !
सरे-राह मगर क्यों तू ,
अपना सड़ा मुह खोल गया,
यहाँ आकर झूठ बोला,
वहाँ जाके सच बोल गया !
वाह भई, शाहिद अफ्रीदी,
तेरा भी ईमान डोल गया,
यहाँ आकर झूठ बोला,
वहाँ जाके तू सच बोल गया !
देख,कितना गिरा देती है
इंसान को, नीयत डोलकर,
बीसियों झूठ बोलने पड़ते है,
फिर एक झूठ बोलकर !
मुह लगाते न तुम जैसों को,
गर हम बड़े दिलवाले होते,
न असुर मूंग दलता छाती,
न राज करते हम पर खोते !
सरे-राह मगर क्यों तू ,
अपना सड़ा मुह खोल गया,
यहाँ आकर झूठ बोला,
वहाँ जाके सच बोल गया !
चित्र एक मेल से मिला !
Labels: TirchiNazar
19 Comments:
धन है तो लुटाया जा रहा है।
गोदियाल साहब, फिर से मुंह खोल गया
कहता है अखबारों ने गलत बोल दिया...
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बहुत सटीक बात कह दी है ...
गिरगिट था रंग तो बदलना ही था....
Raat ke high voltage me main bhee pataa nahee kyaa-kyaa likh detaa hoon, mujhe bhee nahee maaloom rahtaa:) :)
sachchaai bakhan karti hui aapki kavita bhi bhi bahut kuchh bol gaya....badhiya
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (7-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com/
अफ़रीदी जी बस अपना चरित्र ही बयान कर रहें हैं ... अफ़रीदी जी ऐसी प्रतिक्रियाँ देते हुवे दिमाग़ का दिवालियापन ही दिखा रहे हैं ...
aisaa bolkar wahaan JOOTAA khaane se bach gayaa
गोदियाल साहब
जवाब नहीं आपका बहुत खूब
मन की भडास कहीं तो निकालना था ही ना :)
ये अच्छी बात नहीं है।
सही कहा आपने गिरगिट की तरह रंग बदलता इन्सान !
देख,कितना गिरा देती है
इंसान को, नीयत डोलकर,
बीसियों झूठ बोलने पड़ते है,
फिर एक झूठ बोलकर !
SATEEK DAMDAAR ABHIVYAKTI .
बड़े लोग झूठ ही बोलते हैं. सच क्या है उन्हें क्या पता ?
बाप रे- क्या काम्बिनेशन है........
बधाई हो!
टेटूये पर अंगूठा रख दिया आपने तो!
खुश और स्वस्थ रहें !
अशोक सलूजा !
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